back to top
23.1 C
New Delhi
Saturday, April 4, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

उत्तराखंड स्थित हिमालय में एक हजार हिम नदियां और इतनी ही ग्लेशियर झीलें : केंद्र

नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। विशाल हिमालयी भू-संसाधनों का अभी पूरी तरह अन्वेषण नहीं हो पाया है, जो कई प्रकार से हिमालयी क्षेत्र के साथ-साथ पूरे देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान दे सकते हैं। हिमालय के मुख्य संसाधन इसके हिमनद और हिमक्षेत्र हैं जो सिंचाई, उद्योग, जल विद्युत उत्पादन आदि के माध्यम से अरबों लोगों को भोजन उपलब्ध कराते हैं। यह जानकारी रविवार को केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी। केंद्रीय मंत्री ने विचार जताया कि मैदानी क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों में शामिल शोधकर्ताओं की तुलना में हिमालयी इलाके में शोधकर्ताओं की एक अलग भूमिका है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हिमालय में लगभग एक हजार हिम नदियां और इतनी ही संख्या में ग्लेशियर झीलें हैं। उपग्रह डेटा का उपयोग आमतौर पर एक बड़े और दुर्गम क्षेत्र में हिम नदियों या ग्लेशियर झीलों के आयाम और संख्या के बारे में पहली जानकारी प्राप्त करने के लिए त्वरित टोही के लिए किया जाता है, लेकिन भूमि-आधारित डेटा, जहां भी संभव हो, व्यावहारिक सच्चाई के सत्यापन और सटीक मॉडलिंग के लिए आवश्यक हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (डब्ल्यूआईएचजी) उत्तराखंड, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और सिक्किम में कई ग्लेशियरों की निगरानी कर रहा है और उसने मौसम विज्ञान, जल विज्ञान, भूकंपीय स्टेशन, वीसैट जीएसएम के माध्यम से डेटा का ऑनलाइन प्रसारण, स्थापित करके निरंतर मोड पर ग्लेशियरों और झीलों की दीर्घकालिक निगरानी की योजना की परिकल्पना की है। डब्ल्यूआईएचजी में रिसर्च स्कॉलर और ट्रांजिट हॉस्टल का उद्घाटन करने के बाद संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह छात्रावास शोधकर्ताओं, विशेष रूप से महिला शोधकर्ताओं के लिए बहुत आवश्यक आकांक्षा थी और यह निश्चित रूप से आरामदायक काम के वातावरण की सुविधा प्रदान करेगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि लगभग 60 डॉक्टरल और 12 पोस्ट-डॉक्टरल छात्र वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (डब्ल्यूआईएचजी) में भूवैज्ञानिक जांच के आधार पर हिमालय के विभिन्न पहलुओं में शोध कर रहे हैं और संस्थान अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक सुविधाओं और डेटा प्रोसेसिंग केंद्रों से पूरी तरह सुसज्जित है जो न केवल इन-हाउस शोधकर्ताओं की जरूरत पूरी करने के लिए, बल्कि अन्य संस्थानों और विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं के लिए भी गुणवत्तापूर्ण डेटा का निर्माण कर रहे हैं। सन् 1968 में स्थापित डब्ल्यूआईएचजी में कोई रिसर्च स्कॉलर और ट्रांजिट हॉस्टल नहीं था, जिसकी सुविधा अब इस 40 कमरे वाले हॉस्टल के साथ प्रदान की गई है। मंत्री ने कहा कि यह उन्नयन अब छात्रों को विस्तारित घंटों के लिए अपने शोध को आगे बढ़ाने के साथ-साथ आंतरिक प्रयोगशाला सुविधाओं का यथासंभव पूर्ण उपयोग करने में सक्षम बनाएगा। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि डब्ल्यूआईएचजी शक्तिशाली हिमालय के भू-गतिकी विकास, मूल्यांकन, प्रबंधन और शमन प्रदान करने की दृष्टि से भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन, फ्लैश फ्लड आदि के कारण होने वाले भू-खतरों की वैज्ञानिक व्याख्या और भू-संसाधनों की खोज जैसे कि भू-तापीय, खनिज, अयस्क निकाय, हाइड्रोकार्बन, झरने, नदी प्रणाली, आदि को समझने के लिए हिमालयी भूविज्ञान पर एक समर्पित शोध संस्थान रहा है। इनका सामाजिक आर्थिक विकास के लिए वैज्ञानिक तरीके से दोहन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान वर्तमान जलवायु परिवर्तन परिदृश्य में हिमनदों की गतिशीलता और जलवायु-बनावट पारस्परिक क्रिया का अध्ययन करने में सक्रिय रूप से लगा हुआ है। डॉ. सिंह ने कहा कि अधिक ऊंचाई वाले हिमनदों पर अपस्ट्रीम जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और डाउनस्ट्रीम नदी प्रणाली पर उनके परिणामों को समझना बहुत महत्वपूर्ण है जो सिंचाई, पेयजल, औद्योगिक और घरेलू उपयोग, जल विद्युत परियोजनाओं के माध्यम से अरबों लोगों, यहां तक कि पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को भी भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। जलविद्युत परियोजनाओं के कारण प्रभाव मूल्यांकन उपलब्ध करने के अतिरिक्त, यह संस्थान हिमालय में सड़क निर्माण, रोपवे, रेलवे, सुरंग आदि के कारण कई अन्य विकासात्मक गतिविधियों से संबंधित पर्यावरण प्रभाव-मूल्यांकन भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी, जो सबसे बड़ा स्वास्थ्य देखभाल संकट है, लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग ने अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है और सरकार वैज्ञानिक आविष्कार तथा प्रौद्योगिकीय सफलताओं की खोज कर रही है जो लचीलेपन का निर्माण कर सकती है और अर्थव्यवस्था के मजबूत विकास में सहायता कर सकती है, जो लचीलेपन और मजबूत उभरने में मदद कर सके। डॉ. सिंह ने कहा कि भूविज्ञान देश में कई क्षेत्रों, जैसे कि ऊर्जा सुरक्षा, जल सुरक्षा, औद्योगिक विस्तार, प्रबंधन और भू-खतरों का शमन, पारिस्थितिकी और जैव विविधता पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, पर्यावरण का संरक्षण आदि के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। –आईएएनएस जीसीबी/एसजीके

Advertisementspot_img

Also Read:

भारत की 7 सबसे खूबसूरत अल्पाइन झीलें, जो हैं पैराडाइज जैसी-घूमने में कितना लगेगा बजट?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत के हिमालय में बसी ये सात झीलें न सिर्फ़ अपनी अद्भुत सुंदरता के लिए मशहूर हैं, बल्कि ट्रेकिंग और साहसिक...
spot_img

Latest Stories

हरिणी नाम का मतलब-Harinee Name Meaning

Meaning of Harinee / हरिणी नाम का मतलब :Deer/...

Dhurandhar और Bhabhi Ji Ghar Par Hain फेम Saumya Tandon का सिजलिंग रूप कर गया सबको दीवाना, हर तरफ छाई एक्ट्रेस

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। फिल्म 'धुरंधर' (Dhurandhar) में थप्पड़...

राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटने पर क्या कम होगी राघव चड्ढा की सैलरी? जानिए पूरा नियम

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद...

ये रहे क्रिकेट के 5 सबसे बड़े स्टेडियम, विशालकाय आकार कर देगा हैरान

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत में क्रिकेट स्टेडियमों की एक...

गर्मियों में शरीर को हाइड्रेटेड रखेगे ये ड्रिंक्स, सेहतमंद रहेंगे आप

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। अप्रैल का महीना शुरू हो...

लव जिहाद और लैंड जिहाद की धरती नहीं बनने देंगे: असम में गरजे CM योगी, बोले- नो कर्फ्यू, नो दंगा

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵