नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । देश में लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के उद्देश्य से एक संवैधानिक संशोधन विधेयक आज मंगलवार को लोकसभा में पेश कर सकती है। यह संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 “एक राष्ट्र, एक चुनाव” (वन नेशन वन इलेक्शन) के नाम जाना जाता है। इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी किया है। लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक डॉ. संजय जायसवाल ने तीन-लाइन के व्हिप में उन्हें विधेयक पेश किए जाने के दिन सदन में उपस्थित रहने का आग्रह किया है। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधायी मामलों पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार देश में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। इसी क्रम में ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ को लागू करने के लिए दो महत्वपूर्ण विधेयक आज लोकसभा में पेश किए जा सकते हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इन विधेयकों को सदन में प्रस्तुत करेंगे। इनमें एक संविधान संशोधन विधेयक लाया जाएगा, जिसमें लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए संविधान के प्रमुख प्रावधानों में संशोधन का प्रावधान होगा, जबकि दूसरा केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक लाया जाएगा। इस विधेयक के माध्यम से जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और पुडुचेरी जैसे केन्द्र शासित राज्यों के चुनावों को भी एक साथ कराए जा सकें।
शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर तक ही चलेगा
संसद का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर तक ही चलेगा। सत्र समाप्ति को अब मात्र चार दिन शेष बचे हैं। ऐसे में केन्द्र सरकार का प्रयास रहेगा कि इस सत्र में वन नेशन वन इलेक्शन विधेयक पर व्यापक चर्चा हो और इसे जल्द से जल्द पास कराया जा सके। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल आज लोकसभा में इस विधेयक को प्रस्तुत कर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से इन पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजने का अनुरोध करेंगे। विधेयक के पेश किए जाने के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लोकसभा में मौजूद रहने की उम्मीद है।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने वन नेशन वन इलेक्शन वाले विधेयक का ड्राफ्ट तैयार किया है और इस समिति में अमित शाह भी एक सदस्य रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गत 12 दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई थी। कैबिनेट ने इस बिल से जुड़े दोनों प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इसमें से एक संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए है, जबकि दूसरा विधेयक केंद्र शासित प्रदेशों के चुनाव राज्य विधानसभाओं के साथ संपन्न कराने से संबंधित हैं।
भाजपा के सांसदों की संख्या अन्य दलों की अपेक्षा अधिक
इस समय संसद में भाजपा के सांसदों की संख्या अन्य दलों की अपेक्षा अधिक है। संसद में आनुपातिक संख्याबल के आधार पर प्रस्तावित संयुक्त समिति का गठन किया जाएगा। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा समिति की अध्यक्षता करेगी और कई सदस्यों की नियुक्ति करेगी। इस लिहाज से समिति में भाजपा के सदस्यों की संख्या अधिक रहेगी और बिल को पास कराना आसान हो जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन के समर्थन में नहीं विपक्षी दल
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने प्रस्तावित संशोधन के बारे में चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह भारत के संघीय ढांचे को कमजोर कर सकता है। क्षेत्रीय दलों को कमजोर कर सकता है और राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता को केंद्रीकृत कर सकता है। वहीं, भाजपा समेत इस विधेयक के समर्थकों का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से शासन सुचारू होगा और चुनाव संबंधी लागत कम होगी। हालांकि, आलोचक भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवहार्यता पर सवाल उठाते हैं, जिससे लोकतंत्र और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर इसके प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।





