नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। मंगलवार को केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में One Nation One Election बिल पेश किया। JDU, TDP, YSR और शिवसेना जैसे तमाम NDA के घटक दलों ने इस बिल का समर्थन किया है जबकि समाजवादी पार्टी, AAP ने इस बिल का विरोध किया है।
JDU-TDP का समर्थन, सपा-कांग्रेस का विरोध
वन नेशन वन इलेक्शन बिल पेश होते ही राजनीतिक पार्टियां इसके विरोध और समर्थन में उतर आई। TMC की ओर से सांसद कल्याण बनर्जी ने इस बिल को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध किया है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी इस बिल का विरोध किया है। इस बिल को शिवसेना UBT और कांग्रेस पार्टी का साथ भी नहीं मिला। हालांकि NDA के लगभग तमाम घटको ने इस बिल को समर्थन दिया है। JDU-TDP की ओर से इस बिल पर सहमति दी गई जबकि एकनाश शिंदे की शिवसेना ने भी इस बिल के पक्ष में अपनी बात सामने रखी।
क्या है One Nation One election बिल?
अब जब वन नेशन वन इलेक्शन का बिल संसद के निचले सदन में पेश हो गया है तो इसे लेकर चर्चा का बाजार गर्म हैं कि आखिर क्या होता है वन नेशन वन इलेक्शन? आम बोलचाल की भाषा में समझें तो अगर यह बिल संसद को दोनों सदनों में पास हो जाता है तो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा। इसके तहत सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव आम चुनाव के साथ ही होंगे।। सरकार ने इस बिल को लाने के पीछे का मकसद यह बताया है कि हर चुनाव में होने वाले खर्चे को कम किया जा सकता है जिससे देश हर 6 महीने में किसी न किसी चुनाव में जाने से बचेगा। हालांकि विरोधी दल इस बात को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं कि इससे सबसे ज्यादा नुकसान क्षेत्रीय पार्टियों को होगा।





