back to top
24.1 C
New Delhi
Saturday, March 21, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के नियमन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, उम्मीद है कि सरकार जवाब देगी

नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर देश भर में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 2010 और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट रूल्स, 2012 के सभी प्रावधानों को लागू करने का निर्देश देने की मांग की। जन स्वास्थ्य अभियान द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया है कि निजी स्वास्थ्य केंद्र और अस्पताल मरीजों का शोषण कर रहे हैं, और समान प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं। याचिका में दलील दी गई है कि करीब दो दशक पहले केंद्र द्वारा राष्ट्रीय नीति लक्ष्य के रूप में अपनाए गए क्लीनिकल प्रतिष्ठानों में मानकों का विनियमन अभी तक पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि स्वास्थ्य सुविधाएं ठीक से काम नहीं कर रही हैं। मरीजों से अधिक शुल्क लिया जा रहा है और छोटे क्लीनिकों या प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी नहीं हैं। पारिख ने जोर दिया कि 70 प्रतिशत से अधिक रोगी देखभाल निजी क्षेत्र द्वारा प्रदान की जाती है और 30 प्रतिशत से कम रोगी सार्वजनिक क्षेत्र का उपयोग करते हैं। उपचार प्रोटोकॉल के साथ स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के लिए मानक दिशानिर्देश होने चाहिए। पीठ ने कहा, प्रस्तावना कहती है कि अधिनियम पूरे देश में लागू है, है ना? पारिख ने कहा कि कुछ राज्यों ने इसे अपनाया है, लेकिन अन्य राज्यों ने इसी तरह के कानून पारित किए हैं। पारिख ने कहा, जब कोविड आया, तो अधिनियम में स्पष्ट रूप से उन दरों का उल्लेख है जो रोगियों आदि से वसूल की जानी हैं। पारिख ने कहा कि उनके मुवक्किल ने पहले ही सरकार को अभ्यावेदन भेजा था, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। उन्होंने कहा कि 11 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों ने पंजीकरण प्रस्ताव को अपनाया है और अधिक शुल्क लेने और अस्पताल के अधिकारियों द्वारा मरीजों को अस्पताल की दवाएं और उपकरण खरीदने के लिए मजबूर करने के संबंध में शिकायतों को उजागर किया है। पीठ ने कहा कि राज्यों के पास इन प्रतिष्ठानों को पंजीकृत करने और विनियमित करने के संबंध में कुछ तंत्र हैं। पारिख ने कहा कि अगर केंद्र के स्थायी वकील को नोटिस जारी किया जाता है तो इसका कार्यान्वयन संभव होगा। शीर्ष अदालत ने दलीलें सुनने के बाद मामले में नोटिस जारी किया। सुनवाई को समाप्त करते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, हमें उम्मीद है कि सरकार जवाब देगी। याचिकाकर्ता ने पंजीकरण की शर्तों के संबंध में दिशा-निर्देश भी मांगा, जिसमें न्यूनतम मानकों का पालन, प्रक्रियाओं और सेवाओं के लिए निर्धारित दरों का प्रदर्शन और पालन, मानक उपचार प्रोटोकॉल का अनुपालन, जैसा कि क्लिनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम 2010 की धारा 11 और 12 में प्रदान किया गया है, क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट रूल्स, 2012 के नियम 9 के साथ पढ़ा गया। दलील में तर्क दिया गया कि अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 47 के तहत गारंटीकृत सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए इसे अधिसूचित और कार्यान्वित किया जाना चाहिए। –आईएएनएस एमएसबी/आरजेएस

Advertisementspot_img

Also Read:

सियासी हलचल तेज: MP-MLA कोर्ट से इजाजत मिलने के बाद अनंत सिंह कल बनेंगे विधायक

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। 2025 के विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट से जीत दर्ज करने वाले विधायक अनंत सिंह मंगलवार, 03 फरवरी 2026 को सुबह...
spot_img

Latest Stories

Navratri में बना रही हैं साबूदाना की खिचड़ी, तब उपयोग करें इस रेसिपी का

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। नवरात्रि (Navaratri) के दौरान व्रत...

Salman khan की फिल्म मातृभूमि कब होगी रिलीज? सामने आया बड़ा अपडेट

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। सलमान खान (Salman khan) की...

मार्च के बदलते मौसम में बढ़ सकता है फ्लू का खतरा, बचाव के लिए करें ये काम

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मार्च और अप्रैल के महीने...

Tata Punch को टक्कर देने आई नई Hyundai Exter Facelift, जानिए कीमत और फीचर्स

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारतीय कार बाजार में माइक्रो SUV...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵