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Wednesday, March 4, 2026
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इमरजेंसी के बाद जनसंख्या नियंत्रण पर किसी ने बात ही नहीं की, NR नारायणमूर्ति ने बढ़ते पॉपुलेशन पर जताई चिंता

N R Narayana Murthy: इंफोसिस कंपनी के सह संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने यह बात 18 अगस्त, 2024 को मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 20वें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में कहा है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। इंफोसिस कंपनी के सह संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने बढती जनसंख्या और प्रति व्यक्ति के हिसाब से जमीन की उपलब्धता को लेकर भारत के लिए अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि यह भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। बता दें कि एन.आर. नारायण मूर्ति सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के एक जानें मानें उधोगपति हैं। वह पद्म विभूषण से सम्मानित हैं। इंफोसिस कंपनी के सह संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने यह बात 18 अगस्त 2024 को मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 20वें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में कहा है। उन्होंने कहा है कि भारत के सामने बढती जनसंख्या, प्रति व्यक्ति के हिसाब से जमीन की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़ी चुनौती है।  

जिसके कारण भारत के अव्यवहारिक बनने का खतरा मंडरा रहा है

इंफोसिस कंपनी के सह संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 20वें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में कहा है कि हम सभी भारतीयों ने आपातकाल के समय से जनसंख्या नियंत्रण पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया है।जिसके कारण भारत के अव्यवहारिक बनने का खतरा मंडरा रहा है। एन.आर. नारायण मूर्ति ने कहा कि हमारे देश के मुकाबले अमेरिका, चीन और ब्राजील की प्रति व्यक्ति के हिसाब से जमीन की उपलब्धता कहीं अधिक है।

जिसकी वजह से ही वह आज यहां मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद हैं

वहीं इंफोसिस कंपनी के सह संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने अपने संबोधन में कहा है कि हर एक पेशेवर का यह दायित्व होता है कि वह देश की प्रगति में अपना योगदान दे। इसके लिए पेशेवर को अपनी ऊंची आकांक्षाओं और बड़े सपने देखने तथा उन सपनों को सच में बदलने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। इंफोसिस कंपनी के सह संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने इसके लिए एक बड़ा उदाहरण देते हुए कहा कि एक पीढ़ी को दूसरी पीढ़ी का जीवन अच्छा बनाने के लिए कई बलिदान देने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता पिता, भाई बहन और गुरुओं ने उनकी प्रगति के लिए बड़ा बलिदान दिया था, जिसकी वजह से ही वह आज यहां मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद हैं। उनके द्वारा किया गया बलिदान बिल्कुल भी बेकार नहीं गया। 

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