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आपातकाल की कहानी: सिर्फ 1975 नहीं, भारत में 3 बार लग चुकी है इमरजेंसी, जानिए कब-कब और क्यों?

जब भी 25 जून की तारीख आती है, भारत में आपातकाल (Emergency) को लेकर चर्चाएं तेज हो जाती हैं। 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया आपातकाल लोकतंत्र के इतिहास में काले अध्याय के रूप में जाना जाता है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। जब भी 25 जून की तारीख आती है, भारत में आपातकाल को लेकर चर्चाएं तेज हो जाती हैं। 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया आपातकाल लोकतंत्र के इतिहास में काले अध्याय के रूप में जाना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में कुल तीन बार आपातकाल लगाया जा चुका है, और तीनों बार केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।

1. साल 1962 – चीन से जंग के कारण पहला आपातकाल

भारत में पहली बार आपातकाल 20 अक्टूबर 1962 को लगाया गया था, जब चीन ने भारत पर हमला किया था।

प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार ने देश की सुरक्षा के लिए अनुच्छेद 352 का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया।

2. साल 1971 – भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश का उत्थान

दूसरी बार आपातकाल 3 सितंबर 1971 को लगाया गया था, जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़ा और बांग्लादेश को आजाद कराने में मदद की। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस बार भी अनुच्छेद 352 का इस्तेमाल किया।

 3. साल 1975 – इंदिरा गांधी द्वारा आंतरिक अशांति के कारण आपातकाल

25 जून 1975 की रात इंदिरा गांधी ने देश में तीसरी बार और अब तक का सबसे विवादित आपातकाल लगाया। इस बार इसका कारण आंतरिक अशांति और राजनीतिक विरोध बताया गया, लेकिन आलोचक इसे सत्ता बचाने की चाल मानते हैं।

 क्या है अनुच्छेद 352?

संविधान का अनुच्छेद 352 केंद्र सरकार को देश में राष्ट्रीय आपातकाल लगाने की अनुमति देता है: बाहरी हमला हो देश की सुरक्षा खतरे में हो आंतरिक विद्रोह या उथल-पुथल हो लेकिन 1975 का आपातकाल आलोचना के घेरे में इसलिए आया, क्योंकि इसे विरोधी आवाजों को दबाने और सत्ता बचाने के लिए लगाया गया।

 1975 की इमरजेंसी आज भी बहस का विषय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर विपक्षी दलों तक, हर 25 जून को 1975 की इमरजेंसी पर चर्चा होती है। इसे लोकतंत्र की हत्या, मीडिया की आज़ादी का अंत और राजनीतिक दमन के रूप में याद किया जाता है। संविधान में आज भी आपातकाल के प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन अब लोकतंत्र और संविधान की समझ बढ़ी है। फिर भी 1975 जैसी घटनाएं सिखाती हैं कि लोकतंत्र को कमजोर नहीं होने देना चाहिए।

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