नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। दिल्ली शराब घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। आज सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल की जमानत पर रोक खिलाफ याचिका पर कोर्ट में सुनवाई हुई। इस याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा रिहाई पर रोक लगाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। जिस पर जस्टिस मनोज मिश्र और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले हाई कोर्ट से अपनी अर्जी वापस लें, फिर हमारे पास आएं। कोर्ट ने कहा कि बुधवार को इस मामले को सुनते हैं, हाई कोर्ट का ऑर्डर आए तो रिकॉर्ड पर लिया जाए।
हाईकोर्ट ने स्थापित कानूनी प्रक्रिया और परंपरा की अनदेखी की
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा रिहाई पर अंतरिम रोक लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर केजरीवाल की अर्जी में कहा गया कि हाईकोर्ट ने स्थापित कानूनी प्रक्रिया और परंपरा की अनदेखी करते हुए जमानत आदेश पर रोक लगाई है। जबकि निचली अदालत ने 20 जून को अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी थी। लेकिन हाई कोर्ट ने शुक्रवार को इस पर अंतरिम जमानत पर रोक लगा दी।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने दी थी केजरीवाल को जमानत
गौरतलब है कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी थी। इस दौरान विशेष न्यायाधीश न्याय बिंदु ने अरविंद केजरीवाल के जमानत आदेश पर 48 घंटे के लिए रोक लगाने का ईडी के आग्रह को भी खारिज कर दिया था। राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष जज न्याय बिंदु ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर केजरीवाल को जमानत दे दी थी। इसके साथ कोर्ट ने केजरीवाल की जमानत पर कई शर्तें भी लगायीं थी। जिसमें कोर्ट ने उनको जांच को बाधित करने या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करने का आदेश दिया था।
ED पहुंची दिल्ली हाईकोर्ट
राउज एवेन्यू कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले कि सुनवाई के बाद स्थानीय कोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई पूरी होने तक बेल पर रोक रहेगी। 21 जून को दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जहां शीर्ष अदालत ने कहा कि कि अगर हाई कोर्ट ने कहा कि 2 दिन में फैसला दे देंगे। तो ऐसे में परेशानी क्या है? इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम बुधवार को इस मामले को सुनते।
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