नई दिल्ली, 14 जून (हि.स.)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने गुजरात में नवलाखी बंदरगाह के आधुनिकीकरण के लिए पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) को रद्द करने से इनकार कर दिया है। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि पूर्व में भले ही कानून का उल्लंघन हुआ है लेकिन ईसी की मंजूरी देने के पहले पर्याप्त विचार किया गया है। एनजीटी ने कहा कि इस आधार पर ईसी की मंजूरी के आदेश में दखल नहीं दिया जा सकता कि बंदरगाह 1939 से अस्तित्व में है और प्रोजेक्ट के प्रस्तावक ने पूर्व में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया था। एनजीटी ने पर्यावरण सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले उपायों की जरूरतों पर नजर रखने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस बीसी पटेल की अध्यक्षता में एक छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। एनजीटी ने कहा है कि ये समिति किसी दूसरे विशेषज्ञों की मदद लेने को स्वतंत्र होगी। एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय को गुजरात राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जरिये दो हफ्ते के अंदर समिति के समक्ष अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने कहा कि गुजरात राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस आदेश के समन्वय और अनुपालन के लिए नोडल एजेंसी होगा। यह याचिका रोशनी बी पटेल ने दायर की थी। याचिका में पर्यावरण मंत्रालय की ओर से 20 नवंबर 2020 को नवलाखी बंदरगाह के आधुनिकीकरण के लिए गुजरात मैरिटाइम बोर्ड को ईसी देने के फैसले को चुनौती दी गई है। बता दें कि नवलाखी बंदरगाह कच्छ की खाड़ी के दक्षिण पश्चिमी छोर पर हंसस्थल क्रीक में स्थित है और मोरबी से 45 किलोमीटर एवं कांडला से 160 किलोमीटर दूर है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय




