नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। साल 2025 अब पीछे छूटने को है, लेकिन इस साल की राजनीति की कुछ घटनाएं इतनी अहम थीं कि उनका असर सालों तक महसूस किया जाएगा। चुनावी झटकों से लेकर कूटनीतिक गतिरोध तक, यह साल भारत के लिए उतार-चढ़ाव और राजनीतिक बदलाव लेकर आया। आइए जानते हैं वो पांच बड़ी घटनाएं जिन्होंने देश का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल दिया। वर्ष 2025 भारत के राजनीतिक इतिहास में कई उतार-चढ़ाव लेकर आया। राज्य चुनावों से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक पदों से जुड़े फैसलों तक, इन घटनाओं ने न केवल देश की आंतरिक राजनीति को नया आकार दिया, बल्कि विदेश नीति और सामाजिक सद्भाव पर भी गहरा असर डाला।आइए जानते हैं वो पांच बड़ी घटनाएं जिन्होंने देश का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल दिया।
1. दिल्ली विधानसभा चुनाव (फरवरी 2025)
दिल्ली की राजनीति में 27 साल बाद सबसे बड़ा परिवर्तन तब आया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) को सत्ता से बाहर कर दिया।
AAP सरकार के 10 साल के शासन में कथित भ्रष्टाचार, ‘शीशमहल’ विवाद, और BJP द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रवादी सियासत और विकास कार्यों को प्रमुखता देना। BJP ने लंबी प्रतीक्षा के बाद दो-तिहाई बहुमत प्राप्त किया। यह जीत न सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति में बड़ा बदलाव लाई, बल्कि विपक्षी एकता के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई। जीत के बाद BJP ने एक नया चेहरा, रेखा गुप्ता, को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया।
2. वक्फ संशोधन विधेयक (अप्रैल 2025)
अप्रैल 2025 में संसद के दोनों सदनों में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 का पारित होना मोदी सरकार और विपक्ष के बीच एक बड़ा टकराव बिंदु बन गया। सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही लाना था। इसमें वक्फ की परिभाषा, पंजीकरण, और प्रबंधन में सुधार शामिल थे, जिससे वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों और महिलाओं को भी शामिल किया जा सकेगा। विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इसे वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता और मुस्लिम धार्मिक स्वतंत्रता को कमजोर करने वाला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक कुप्रबंधन खत्म करने के नाम पर सरकार को अत्यधिक शक्ति देता है। इस विधेयक के कानून बनने के बाद कई चुनावों में यह मुद्दा बनाया गया, हालांकि सरकार ने मुसलमानों को कोई नुकसान न होने का आश्वासन दिया।
3. पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर (अप्रैल-मई 2025)
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा 27 पर्यटकों की हत्या ने देश को झकझोर दिया। इस हमले के जवाब में भारत ने एक बड़ा सैन्य कदम उठाया।7 मई 2025 की रात को भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसके तहत पाकिस्तान के 150 किलोमीटर तक अंदर घुसकर आतंकी ठिकानों को तबाह किया गयापाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया और एक बड़ा कूटनीतिक संकट पैदा हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित दावे और भारत-पाकिस्तान के DGMO स्तर की द्विपक्षीय बातचीत के बाद भारत ने 10 मई की शाम को अचानक कार्रवाई रोक दी। विपक्ष ने ट्रंप के दबाव में कार्रवाई रोकने का आरोप लगाकर सरकार को घेरा, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद के अंदर सफाई देनी पड़ी। यह मुद्दा आज भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
4. उपराष्ट्रपति चुनाव (सितंबर 2025)
देश के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को अचानक स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया। धनखड़ कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देने वाले पहले उपराष्ट्रपति बने। विपक्ष ने स्वास्थ्य को औपचारिक बहाना बताते हुए, इस्तीफे का असली कारण राजनीतिक दबाव या सरकार से टकराव बताया और इस्तीफे की टाइमिंग पर सवाल उठाए।एनडीए उम्मीदवार,सीपी राधाकृष्णन (तमिलनाडु से, महाराष्ट्र के गवर्नर) इंडिया गठबंधन उम्मीदवार, बी सुदर्शन रेड्डी ने संख्याबल के आधार पर, सीपी राधाकृष्णन ने 452 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की, जबकि बी सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले। राधाकृष्णन 152 वोटों के अंतर से देश के 15वें उपराष्ट्रपति बने।
5. बिहार विधानसभा चुनाव (अक्टूबर-नवंबर 2025)
नवंबर 2025 में दो चरणों में हुए बिहार विधानसभा चुनाव ने देश की भावी राजनीति की दिशा तय की। जिसमें मुख्य दावेदार एनडीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में और महागठबंधनतेजस्वी यादव के नेतृत्व में हुआ। इसके मुख्य मुद्दे एनडीए ने ने लालू प्रसाद यादव के ‘जंगलराज’ को याद दिलाया और विकास की बात कही, जबकि महागठबंधन ने बेरोजगारी, पलायन और अपराध पर NDA सरकार को घेरा।
इसका ऐतिहासिक नतीजा ये हुआ कि, 14 नवंबर को आए नतीजों ने इतिहास रच दिया। 243 सीटों वाली विधानसभा में NDA ने 202 सीटें जीतकर बंपर जीत हासिल की। इसमें एनडीए की सीटें, बीजेपी की (89), बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को कुल मिलाकर 202 सीटें मिलीं। इसमें बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और उसे 89 सीटें हासिल हुईं। जेडीयू को 85 सीटें मिलीं, जबकि सहयोगी दलों में एलजेपी (R) को 19 सीटें, ‘हम’ को 5 सीटें और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटें मिलीं।वहीं, महागठबंधन की स्थिति बहुत कमजोर रही; इसमें RJD को 25 सीटें और कांग्रेस को केवल 6 सीटें मिलीं।
NDA ने सत्ता बरकरार रखी और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। तेजस्वी यादव की इस बड़ी हार ने विपक्षी गठबंधन में गहरी दरारें पैदा कीं और 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।





