नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र के दिग्गज कांग्रेस नेता और देश के पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल चाकुरकर का शुक्रवार सुबह 12 दिसंबर लातूर में निधन हो गया। वे 91 साल के थे। लंबे समय से बीमार चल रहे पाटिल ने सुबह करीब 6:30 बजे अपने घर ‘देववर’ में अंतिम सांस ली। उनके निधन पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने शोक जताया है।
लातूर से सात बार बने सांसद, राजनीति में मजबूत पकड़
शिवराज पाटिल लातूर जिले के चाकुर क्षेत्र से आते थे और वहां उनका व्यापक जनाधार था। वे 1980 से 1999 तक लगातार सात बार लातूर लोकसभा सीट से चुने गए। इस दौरान वे भारतीय राजनीति में एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित हुए। उन्होंने उस्मानिया यूनिवर्सिटी से साइंस और मुंबई यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की थी। राजनीति में उनका सफर सहज, सरल और स्वच्छ छवि के लिए जाना जाता था।
इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकार में अहम जिम्मेदारियाँ
शिवराज पाटिल ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण पद संभाले। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकार में वे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का हिस्सा रहे। वर्ष 1991 से 1996 तक लोकसभा स्पीकर रहे और इस दौरान उन्होंने भारतीय संसद में कई ऐतिहासिक फैसलों और चर्चाओं का नेतृत्व किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने कई पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंसों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
2004 में चुनाव हारने के बाद भी मिला था बड़ा पद
लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया और 2004 में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री बनाया गया। हालांकि, 2008 मुंबई आतंकी हमले के बाद सुरक्षा चूक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। शिवराज पाटिल का राजनीतिक करियर मेहनत, सरलता और समर्पण का प्रतीक रहा। उनके निधन से महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है।





