नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मध्यप्रदेश इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। राजा हत्याकांड की मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी के मोबाइल कॉल डिटेल से पता चला है कि वह वारदात से पहले किसी संजय वर्मा नामक युवक से लगातार संपर्क में थी। और लगातार उसे कॉल कर रही थी।
कॉल डिटेल से पता चला कि सोनम ने 1 मार्च से 25 मार्च के बीच 112 बार संजय वर्मा को कॉल किया, जिससे अब यह अंदेशा और गहरा हो गया है कि हत्या की साजिश में सिर्फ राज कुशवाहा ही नहीं, बल्कि अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संजय वर्मा कौन है?
वहीं, पुलिस को भी संदेह है कि हो सकता है कि आरोपियों ने फर्जी नाम से सिम लेकर ही इसका इस्तेमाल किया हो। पुलिस का कहना है कि इसकी पूरी संभावना है कि सोनम और उसके साथियों ने फर्जी नाम से सिम लिया हो।
पूछताछ के लिए इंदौर पहुंची शिलांग पुलिस
इससे पहले, शिलांग पुलिस ने मंगलवार को इंदौर में राजा रघुवंशी के घर पहुंचकर उनके परिवारों से पूछताछ की, पुलिस ने राजा की मां और दोनों भाई से करीब एक घंटे तक बातचीत की। इस दौरान पुसिल ने सोनम रघुवंशी के व्यवहार और घटनाक्रमों को लेकर सवाल किए गए। शिलांग पुलिस ने घटना से पहले सोनम के व्यवहार, उसके परिवार से संबंध, और हनीमून यात्रा से जुड़े पहलुओं पर फोकस किया। शिलांग पुलिस ने इसके पहले उस फ्लैट की तलाशी भी ली थी, जहां राजा की हत्या करने के बाद सोनम आकर रूकी थी।
हत्या में शामिल दूसरा औजार भी मिला
मंगलवार को ही शिलांग पुलिस ने हत्या की जगह पर क्राइम सीन रिक्रिएशन किया। इस प्रक्रिया के दौरान उस खाई के पास से दूसरा हथियार भी मिला है, जो अब तक गायब था। पुलिस के अनुसार, राजा की हत्या में दो हथियारों का इस्तेमाल हुआ था। एक पहले ही मिल चुका था, दूसरा अब रिक्रिएशन के दौरान बरामद हुआ है।
कोई सुपारी नहीं, दोस्ती में हत्या
शिलांग पुलिस ने हाल ही में आरोपी सोनम से पूछताछ के बाद यह स्पष्ट किया था कि, यह सुपारी किलिंग का मामला तो नहीं है। राज कुशवाह ने अपने दोस्तों आकाश, विशाल और आनंद को हत्या के लिए तैयार किया। कोई बड़ी रकम नहीं दी गई, बल्कि राज ने केवल 59,000 रुपये खर्च के लिए दिए थे।
तीन बार विफल, चौथी बार कामयाब
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने चार अलग-अलग जगहों पर राजा की हत्या करने का प्रयास किया था। पहली कोशिश गुवाहाटी में नाकाम रही, दूसरी नोंघरियाह में, जहां लाश ठिकाने लगाने की जगह नहीं मिली। तीसरी मावलखियात में भी योजना फेल हुई। आखिरकार, वैसेडॉन्ग फॉल्स के पास 23 मई को हत्या को अंजाम दिया गया।0





