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Tuesday, March 10, 2026
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National Youth Day 2025 : स्वामी विवेकानंद के ये विचार आज भी युवाओं को देते हैं एक नई दिशा

स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का मकसद उनके विचारों को देश के युवाओं तक पहुंचाना है।

नई दिल्ली/ रफ्तार डेस्क/ आज यानी 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती है, इस दिन को National Youth Day के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद एक महान भारतीय संत और दार्शनिक थे। उनकी जयंती को युवा दिवस के रूप में मनाने के पीछे मकसद ये है कि उनके विचारों को देश के युवाओं तक पहुंचाया जाए। स्कूल-कॉलेजो में इस दिन को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। भाषण, नाटक, कविता पाठ जैसे कॉम्पिटीशन आज के दिन आयोजित कराए जाते हैं।

क्या है National Youth Day 2025 Theme

इस साल के राष्ट्रीय युवा दिवस के लिए थीम रखी गई है- Youth for a Sustainable Future: Shaping the Nation with Resilience and Responsibility माने ‘स्थायी भविष्य के लिए युवाओं की भूमिकाः जिम्मदारी और कर्मठता के साथ राष्ट्र निर्माण’ है। बता दें कि साल 1984 से स्वामी विवेकानंद की जयंती को युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

भारत को दिलाई पूरी दुनिया में पहचान

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके माता-पिता ने उनका नाम नरेंद्रनाथ दत्त रखा था। उनके पिता कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील थे। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान स्वामी विवेकानंद की मुलाकात रामकृष्ण परमहंस से हुई। आध्यात्म की ओर उनका झुकाव शुरुआत से ही था। वह ब्रह्म समाज में शामिल हो गए। 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित धर्म सम्मेलन में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस सम्मेलन में उनके ओजस्वी भाषण ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। साल 1902 में 4 जुलाई को केवल 39 की उम्र उन्होंने बेलूर के रामकृष्ण मठ में समाधि ले ली थी।

स्वामी विवेकानंद के Inspirational Quotes

– उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।

– तुम्हारे अंदर सारी शक्ति छिपी हुई है। खुद पर विश्वास करो और आगे बढ़ो।

– सबकुछ खो देने से ज्यादा बुरा उस उम्मीद को खो देना है जिसके भरोसे हम सब कुछ वापस पा सकते हैं।

– युवा वही होता है, जिसके हाथों में शक्ति, पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।

– पहले हर अच्छी बात का मज़ाक बनता है। फिर उसका विरोध होता है। आखिर में उसे स्वीकार कर लिया जाता है।

– बहुत सी कमियों के बाद भी हम खुद से प्रेम करते हैं, तो दूसरों में एक कमी से कैसे घृणा कर सकते हैं।

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