नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। 23 दिसंबर का दिन भारतीय इतिहास में किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। पूर्व से ही भारत को किसान प्रधान देश माना जाता रहा है। किसानों के मसीहा रहे चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को हुआ था। यही कारण है कि हर साल 23 दिसंबर को किसान दिवस (Farmers Day 2024) मनाया जाता है। चौधरी चरण देश के पूर्व प्रधानमंत्री तो रहे ही हैं, इसके अलावा उन्होंने किसान हित में कई काम किए हैं जिनकी नीतियों से कृषि क्षेत्र में आमूल चूल परिवर्तन हुए हैं। उन्हीं के सम्मान में हर साल इस दिन चौधरी चरण सिंह को याद किया जाता है।
किसान दिवस की शुरुआत कब से हुई थी?
किसान दिवस मनाने की शुरुआत 2001 में हुई थी। भारत सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन के उपलक्ष्य में किसान दिवस मनाने की घोषणा की थी। इसके पीछे सिर्फ यह कारण था कि उन्होंने किसान हित और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण काम किए थे। चौधरी चरण सिंह ने ही किसान ऋण राहत विधेयक का अधिनियम किसान हित में समर्पित किया था जिसका मकसद लोन के कर्ज तले दबे किसानों को राहत मिल सके।
चौधरी चरण सिंह की राजनीति के केंद्र में थे किसान
चौधरी चरण सिंह साल 1979 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री बने थे लेकिन इससे पहले ही साल 1978 में उन्होंने किसान ट्रस्ट की स्थापना की थी जिसका मकसद किसाने के उत्थान में काम करना था। इसका मकसद किसानों को यह बताना था कि न्याया का क्या महत्व है और कैसे एकजुट रहकर किसान कौम को सशक्त किया जा सकता है। चौधरी चरण सिंह की इस पहल के चलते ही समाज में किसानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव आना शुरु हुआ था। इसी पहल के चलते किसानों के लिए प्रगति का मार्ग प्रशस्त हुआ था।





