नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंकीपॉक्स को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। यह निर्णय एक दम से मामलों में हुई बढ़ोतरी के कारण लिया गया है। हालांकि भारतीय स्वास्थ्य प्रशासन का कहना है कि देश में इसके फैलने का खतरा बहुत ही कम है।
मार्च 2024 में केरल में सामने आया था मामला
केरल राज्य में मंकीपॉक्स का मामला पिछले साल सामने आया था। साल 2022 में इसकी शुरुआत के बाद भारत में मंकीपॉक्स के कुल 30 मामले सामने आए थे। हालांकि अभी इसके भारत में मामले बहुत कम हैं।
भारत में बरती जा रही है सावधानी
WHO के द्वारा इमरजेंसी घोषित करने के बाद भारत में सावधानी बरती जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय इसको लेकर सतर्कता बरत रहा है। इंटरनेशनल एंट्री पॉइंट्स पर जल्द ही एडवाइजरी जारी कर दी जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा स्वास्थ्य मंत्रालय के कर्मचारियों, NCDC, ICMR के साथ स्थिति की समीक्षा करेंगे और उचित कदम उठाएंगे।
ये बनाए गए हैं इलाज के लिए सेंटर
इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल को मंकीपॉक्स का इलाज करने के लिए निर्दिष्ट किया है। इसके मामले सबसे अधिक यूरोप में पाए जा रहे हैं। स्वीडन में नए स्ट्रेन के सामने आने के बाद ECDC ने रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम को अपग्रेड किया है।
एयरपोर्ट और सीमा प्रशासन अलर्ट पर
भारत में एयरपोर्ट और सीमा प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।स्वास्थ्य मंत्रालय ने यहां पर निगरानी बढ़ा दी है। साथ ही डायग्नोसिस के लिए देश भर में 32 टेस्टिंग लैबोरेट्री का गठन किया गया है।
WHO के अनुसार, साल 2022 से 99,176 मंकीपॉक्स के मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामले 116 देशों में दर्ज किए गए हैं। इसके कारण 208 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इस साल 2024 में 15,600 मामले दर्ज किए गए हैं जबकि 537 लोगों की मौत हो चुकी है।





