लखनऊ, 26 जून (हि.स.)। विश्वविद्यालय द्वारा परिसर में चल रहे समस्त निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए प्रोजेक्ट माॅनिटरिंग कमेटी का गठन किया जाये। ये कमेटी निर्माण कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता का अनुश्रवण करते हुए रिपोर्ट दें। ये निर्देश उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को राजभवन से मदन मोहन मालवीय प्राविधिक विश्वविद्यालय, गोरखपुर व डाॅ.शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ की ऑनलाइन समीक्षा बैठक के दौरान दिये। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में कोर्ट केस कम से कम हो, इसके लिये विश्वविद्यालय में प्राप्त होने वाली शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया जाये तथा जो कोर्ट केस प्रचलित हैं उनकी भलीभांति समीक्षा की जाये। लम्बित मामले आपसी समझौते से सुलझाने के प्रयास करें। कहा कि विश्वविद्यालय में लम्बित उपाधियों को यथाशीघ्र विद्यार्थियों के पते पर भेजना सुनिश्चित करे। छात्रों के समस्त प्रमाण पत्र डिजिटल लाॅकर पर अपलोड किया जाये। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर चयन प्रक्रिया यथाशीघ्र शुरू करें एवं नियुक्ति प्रक्रिया के लिये निर्धारित सभी निर्देशों का पालन करने के साथ ही चयन प्रक्रिया और उसके मापदंडों को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कराये। योग्य अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट भी बनायी जानी चाहिये। आगे कहा कि विश्वविद्यालय के आवासीय परिसरों को अनाधिकृत व्यक्तियों को आवंटित न किया जाये तथा प्रयास करें कि आवासीय परिसर में प्रीपेड मीटर लगाये जायें। विश्वविद्यालय महालेखाकार एवं लोकल ऑडिट की आपत्तियों का निस्तारण कर समस्त अभिलेखों सहित आख्या प्रेषित करें। जिन कर्मचारियों को अग्रिम भुगतान किये गये हैं, उन्हें नियमानुसार समयबद्धता के साथ समायोजित किया जाये। मल्टीपल खाते बंद करे तथा बैलेंस सीट को नियमानुसार तैयार करना सुनिश्चित करें। नईं शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को नियमानुसार लागू किया जाये। सुझाव दिया कि नईं शिक्षा नीति में मल्टी एंट्री, मल्टी एग्जिट, नवाचार स्टार्टअप जैसे पाठ्यक्रमों को शामिल किया जाये। उन्होंने एक सेंटर आफ एक्सीलेंसी स्थापना का सुझाव दिया। नईं शिक्षा नीति लागू करने की दिशा में मदन मोहन मालवीय प्राविधिक विश्वविद्यालय, गोरखपुर की तारीफ की जबकि डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ, द्वारा इस दिशा में सार्थक प्रयास न किये जाने पर नाराजगी जताई। राज्यपाल ने महिला अध्ययन केन्द्रों की समीक्षा करते हुये निर्देश दिया कि इन अध्ययन केन्द्रों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, समाज में सहभागिता बढ़ाने, महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, महिलाओं का कार्य स्थल पर उत्पीड़न के मनोवैज्ञानिक प्रभाव व रोकथाम जैसे विषयों की जानकारी महिलाओं को दी जानी चाहिए। विश्वविद्यालय में वेबिनार तथा गोष्ठियां आयोजित की जाये और उनमें प्रमुखता से नवनिर्वाचित महिला ग्राम प्रधानों व स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आमंत्रित कर उन्हें कोविड-19 टीकाकरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, राज्य एवं केन्द्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की भी जानकारी दी जाए। उन्हें उनकी ग्रामीण विकास की प्राथमिकताएं बतायें। मेरा गांव कुपोषण एवं टीबी मुक्त कैसे बने, गांव में मातृ शिशुदर कैसे घटे जैसे कल्याणकारी कार्यक्रमों से उन्हें परिचित करायें। ऐसा करने से गांव कुपोषण मुक्त होने के साथ-साथ विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा। राज्यपाल ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की सम्भावना के दृष्टिगत निगरानी समितियों के माध्यम से अधिक से अधिक टीकाकरण,कोरोना किट वितरित की जाये। इस दिशा में ग्राम प्रधानों को भी प्रेरित करें ताकि लोग टीकाकरण की अफवाहों से बच सके और गांव का शत-प्रतिशत टीकाकरण हो सके। विश्वविद्यालय छात्रों का एक समूह तैयार करें जो प्रभावी ढंग से अपने भाषणों के माध्यम से गांव में लोगों को विभिन्न सामाजिक बुराइयों के प्रति अगाह कर सकेें। राज्यपाल जी ने इस अवसर पर छात्रों, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों तथा उनके परिवार का शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने के निर्देश दिये। बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव महेश कुमार गुप्ता, विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज जानी व विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अधिकारी ऑनलाइन जुड़े रहे। हिन्दुस्थान समाचार/दीपक




