नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार इस बार के विधानसभा मॉनसून सत्र में विपक्ष तो घेरने में कामयाब रही, लेकिन मोहन यादव सरकार अपने ही विधायकों के तीखे सवालों और मुद्दों के निशाने पर आ गई। सदन में पार्टी के ही एक दर्जन विधायकों ने अपनी सरकार पर सवाल खड़ कर दिए और कई मुद्दों पर मोहन यादव सरकार घिरती हुई नजर आई। इस दौरान, सदन में मंत्री और पार्टी के विधायकों के बीच असहज की स्थिति बन गई। कारण की विधायकों ने अपनी ही सरकार से सरकारी योजनाओं भ्रष्टाचार, अवैध खनन, पेपर लीग, लॉ-एंड-ऑर्डर को लेकर तीखें सवाल पूछ लिए, हालांकि, विधायकों के उन सवालों का जवाब मंत्रियों ने दिया।
‘विधायक भी अपनी सरकार से संतुष्ट नहीं’
इस मौके का फायदा उठाते हुए विपक्ष ने भी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा कि जब भाजपा के अपने विधायक ही सरकार से संतुष्ट नहीं हैं, तो यह स्पष्ट है कि सरकार जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित और जमीन और लाभ आम जनता तक पहुंच नहीं है।
एक दर्जन विधायकों ने अपनी पार्टी को घेरा
वहीं, भाजपा की ओर से कहते हुए प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है और उसके विधायक जनता से जुड़े मुद्दे उठाते रहेंगे। लेकिन कांग्रेस सकारात्मक की राजनीति करे और जनहित के मुद्दों पर सहयोगी की उम्मीद किया जाती है।
सदन में जिन भाजपा विधायकों ने सवाल उठाए, उनमें सीनियर नेता गोपाल भार्गव ने आदिवासियों को दिए गए पट्टों पर कब्जे का मुद्दा उठाया। उमाकांत शर्मा ने सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जें को लेकर चिंता जताई। गायत्री राजे पवार ने उज्जैन की शिप्रा नदी में फैक्ट्रियों का दूषित पानी मिलने का मामला उठाया।
लव जिहाद, खाद वितरण, भूजल स्तर जैसे मुद्दें उठाए
संजय पाठक ने खाद वितरण में फर्जीवाड़ा का मुद्दा उठाया, जबकि आशीष शर्मा ने लव जेहाद से जुड़े मामलों की ओर ध्यान केंद्रित कराया। रमेश खटीक ने बिजली बिलों में बढ़ोतरी माफ न होने की बात कही। नीना वर्मा ने शांति समितियों के गठन में हो रही देरी की बात याद दिलाई। भूपेंद्र सिंह ने गिरते भूजल स्तर को लेकर सरकार से ठोस नीति की मांग की।
सत्ता पक्ष के भीतर भी असंतोष की आवाज
सदन में घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि सत्ता पक्ष के भीतर भी असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं और भाजपा विधायकों का यह रुख आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, बीजेपी असंतुष्ट नेताओं को मनाने में माहिर है। लेकिन आगे देखना होगा कि पार्टी इन नेताओं को क्या सलाह देती है।





