नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। देश के जाने माने बिजनेसमैन और टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा का 9 अक्टूबर 2024 की रात को निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। रतन टाटा के निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर चल रही है। वह एक बिजनेसमैन जरूर थे, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने व्यापार में मुनाफा देखने की जगह देश के हित का ज्यादा सोचा, यही कारण है कि उनके निधन के बाद सभी देशवासियों में काफी दुःख का माहौल है।
एक मंत्री ने व्यापार के लिए 15 करोड़ रुपये देने का ऑफर किया था
रतन टाटा ने अपने बिजेनेस के जरिए शिक्षा से लेकर कार तक हर चीज में इस तरह के कार्य किए कि उसका लाभ देश की जनता को मिल रहा है। वह देश और समाज के लिए अपने कारोबार से पैसों का योगदान देने में भी कभी पीछे नहीं रहे थे। रतन टाटा के राष्ट्रप्रेम को उनके एक बहुत ही पुराने इंटरव्यू के माध्यम से भी जाना जा सकता है। उन्होंने वर्ष 2010 में एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें एक मंत्री ने किसी व्यापार को करने के लिए 15 करोड़ रुपये देने का ऑफर किया था। इसके बाद रतन टाटा ने कहा था कि उन्होंने उस मंत्री के ऑफर को ठुकरा दिया था।
आप भ्रष्टाचार से किस तरह से बचते हैं?
इसके बाद मीडिया चैनल ने रतन टाटा से पूछा था कि आप भ्रष्टाचार से किस तरह से बचते हैं। इस पर रतन टाटा ने मीडिया चैनल को कहा था कि यह तो खुदपर ही निर्भर करता है। आप इसको कभी समझ नहीं पाएंगे। रतन टाटा के राष्ट्रप्रेम को उनके कार्यों द्वारा आसानी से देखा जा सकता है। इसके लिए आप उनका एक और पुराना इंटरव्यू देख सकते हैं, जिसमे उन्होंने कहा था कि एक बार बारिश के समय में उन्होंने एक (टू-व्हीलर)स्कूटर में एक ही परिवार के चार लोगों को भीगता हुआ देखा था, जिसको देखकर उन्हें बहुत बुरा लगा था। जिसके बाद उन्होंने बहुत ही कम कीमत में टाटा नेनो कार बनाने का फैसला किया था। रतन टाटा के सारे बिजेनेस के फैसले राष्ट्रहित को लेकर ही होते थे।





