नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय रहते और काम करते हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा किसी भी विवाद के समाधान के लिए बातचीत और शांति का समर्थन करता है। उन्होंने इस संघर्ष में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
CCS बैठक में लिया गया स्थिति का जायजा
जयशंकर ने बताया कि 1 मार्च 2026 को Cabinet Committee on Security (CCS) की बैठक हुई थी, जिसमें ईरान पर हुए हमलों और उसके बाद की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक प्रभाव जैसे मुद्दों पर फोकस किया गया। सरकार ने सभी मंत्रालयों को हालात के अनुसार जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
खाड़ी देशों में 1 करोड़ भारतीयों की चिंता
विदेश मंत्री ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में करीब 1 करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। इसके अलावा ईरान में भी कई भारतीय छात्र और पेशेवर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि सरकार लगातार भारतीयों के संपर्क में है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। दूतावासों की ओर से पहले ही एडवाइजरी जारी की गई थी और लोगों से जरूरत पड़ने पर जल्द भारत लौटने की अपील की गई थी।
ईरान से भारतीयों की सुरक्षित निकासी
जयशंकर ने बताया कि ईरान में फंसे भारतीय छात्रों और नागरिकों को दूतावास की मदद से सुरक्षित निकाला गया। कई लोगों को अर्मेनिया के रास्ते बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि सरकार हर भारतीय की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है और जरूरत पड़ने पर आगे भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहेगा। विदेश मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि ईरान के तीन जहाज हिंद महासागर में मौजूद थे। ईरान के अनुरोध पर भारत ने उनमें से एक जहाज को डॉकिंग की अनुमति देकर शरण दी। उन्होंने कहा कि इस मदद के लिए ईरान ने भारत को धन्यवाद भी दिया है।
ऊर्जा सप्लाई और व्यापार पर असर
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति और सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है। कुछ मर्चेंट नेवी जहाजों पर हमले की घटनाएं भी हुई हैं, जिनमें दो भारतीयों की मौत और एक के लापता होने की खबर है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर सतर्क है और हालात पर लगातार नजर रख रहा है। इस दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge ने भी ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी करीब 55% ऊर्जा जरूरतें पश्चिम एशिया से आयात के जरिए पूरी करता है, इसलिए वहां का तनाव भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों को प्रभावित कर सकता है।




