नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिका में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वह आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। कांग्रेस पार्टी आरक्षण की सीमा को 50% से ज्यादा बढ़ाएगी, जिससे दलितों और पिछड़े वर्गों को और फायदा हो। उनके इस बयान पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि राहुल ने गुमराह करने वाला गलत बयान दिया है।
गुमराह करने वाला गलत बयान: मायावती
मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि कांग्रेस नेता श्री राहुल गांधी की अब यह सफाई कि वे आरक्षण के विरुद्ध नहीं हैं स्पष्टतः गुमराह करने वाली गलतबयानी है। केन्द्र में बीजेपी से पहले इनकी 10 साल रही सरकार में उनकी सक्रियता में इन्होंने सपा के साथ मिलकर SC/ST का पदोन्नति में आरक्षण बिल पास नहीं होने दिया इसका यह प्रमाण।
देश में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत बढ़ी
उन्होंने एक और पोस्ट कर कहा है कि इनके द्वारा देश में आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से बढ़ाने की बात भी छलावा, क्योंकि इस मामले में अगर इनकी नीयत साफ होती तो कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों में यह कार्य जरूर कर लिया गया होता। कांग्रेस ने न तो ओबीसी आरक्षण लागू किया और न ही SC/ST आरक्षण को सही से लागू किया।
सत्ता में नहीं होती को कांग्रेस बड़ी-बड़ी बातें करती है: मायावती
इसी क्रम में एक और पोस्ट में कहा कि इससे स्पष्ट है कि जब कांग्रेस सत्ता में नहीं होती है तो इन उपेक्षित SC/ST/OBC वर्गों के वोट के स्वार्थ की खातिर इनके हित व कल्याण की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जब सत्ता में रहती है तो इनके हित के विरुद्ध लगातार कार्य करती है। ये लोग इनके इस षडयंत्र से सजग रहें।
दरअसल राहुल गांधी ने अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में कहा कि कांग्रेस पार्टी आरक्षण खत्म करने के बारे में तब सोचेगी जब भारत “निष्पक्ष जगह” बन जाएगा, जो कि अभी नहीं है। उन्होंने जाति जनगणना कराने की आवश्यकता पर भी जोर देते हुए कहा कि देश की 90 प्रतिशत आबादी – ओबीसी, दलित और आदिवासी का देश में उचित प्रतिनिधित्व न होना “कमरे में हाथी” है।
कमरे में हाथी है: राहुल गांधी
गांधी ने कहा, “कमरे में हाथी है। जब हम संस्थानों, व्यवसायों और मीडिया पर कब्ज़ा करने की बात करते हैं, तो कमरे में हाथी यह है कि भारत के 90 प्रतिशत – ओबीसी, दलित, आदिवासी खेल का हिस्सा ही नहीं हैं। यह वास्तव में कमरे में हाथी है।” उन्होंने आगे कहा कि जाति जनगणना स्वतंत्रता के बाद से निचली जातियों, पिछड़ी जातियों और दलितों की भागीदारी का आकलन करने का एक सरल अभ्यास है।




