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Monday, March 2, 2026
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रामभद्राचार्य की बाबा साहेब पर टिप्‍पणी को लेकर भड़की मायावती, बोलीं- “चुप रहें तो ठीक रहेगा…”

BSP प्रमुख मायावती ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। हालांकि उन्‍होंने किसी का नाम नहीं लिया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के एक हालिया बयान पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ साधु-संत केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए अनावश्यक बयानबाजी करते हैं। मायावती ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के अद्वितीय योगदान को न समझ पाना दुर्भाग्यपूर्ण है और इस विषय पर अधूरी जानकारी के आधार पर टिप्पणी करने से बेहतर है कि ऐसे लोग चुप रहें।

रामभद्राचार्य के बयान पर मायावती की तीखी प्रतिक्रिया


बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट जारी कर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के विवादित बयान पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बिना नाम लिए ऐसे साधु-संतों को चेतावनी दी जो सुर्खियों में बने रहने के लिए बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर पर आधारहीन बयानबाजी करते हैं। मायावती ने लिखा कि “जैसा कि विदित है कि आए दिन सुर्खियों में बने रहने के लिए विवादित बयानबाजी करने वाले कुछ साधु-संतों को परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के भारतीय संविधान के निर्माण में रहे उनके अतुल्य योगदान की सही जानकारी नहीं है। ऐसे में, यदि वे इस विषय पर चुप रहें, तो यह अधिक उचित होगा।”


उन्होंने आगे कहा कि बाबासाहेब के अनुयायी मनुस्मृति का विरोध क्यों करते हैं, इसे भी जातिवादी मानसिकता को त्याग कर समझने की आवश्यकता है। मायावती ने स्पष्ट किया कि “बाबा साहेब एक महान विद्वान थे। जो साधु-संत आज उनके खिलाफ बोल रहे हैं, वे उनकी विद्वता के सामने कुछ भी नहीं हैं। ऐसे में, उन्हें किसी भी प्रकार की टीका-टिप्पणी करने से बचना चाहिए, यही उचित और नेक सलाह है।”


जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने क्‍या दिया था बयान ?


जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर पर की गई टिप्पणी के बाद मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि उन्‍होंने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन विवादित बयान देने वाले साधु-संतों को “चुप रहने” की नसीहत दी है। दरअसल, रामभद्राचार्य ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि “डॉ. अंबेडकर को संस्कृत भाषा का ज्ञान नहीं था। अगर उन्हें संस्कृत आती, तो वे मनुस्मृति का अपमान नहीं करते।”

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