नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। केंद्र सरकार ने पहली बार आज़ादी के बाद देश में जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की है। यह फैसला काफी समय से सामाजिक संगठनों और नेताओं की मांग रही है। अब जब सरकार ने यह कदम उठाया है, तो इस पर सियासी प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं।
मायावती ने भाजपा-कांग्रेस दोनों पर बोला हमला
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही एक जैसे हैं और इनका इतिहास बहुजन समाज के लिए ठीक नहीं रहा है।
“1931 के बाद पहली जातिगत जनगणना, कांग्रेस को इतिहास नहीं भूलना चाहिए”
मायावती ने कहा कि 1931 के बाद यह पहली बार है जब जातीय जनगणना हो रही है। लेकिन कांग्रेस इसका श्रेय लेना चाहती है, जबकि उसका इतिहास दलित और पिछड़े वर्ग को उनके हक से वंचित रखने वाला रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस का नया ‘बहुजन प्रेम’ सिर्फ दिखावा है।
“भाजपा भी कांग्रेस से कम नहीं”
मायावती ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आरक्षण और संविधान के जनकल्याणकारी प्रावधानों को कमजोर करने में भाजपा भी पीछे नहीं रही है। उन्होंने कहा कि अब सिर्फ वोटों के कारण भाजपा को जातीय जनगणना की मांग के सामने झुकना पड़ा है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।मायावती ने कहा कि अगर भाजपा और कांग्रेस की नीयत सही होती तो आज ओबीसी समाज देश के विकास में बराबर का भागीदार होता। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर का आत्म-सम्मान और स्वाभिमान का मिशन अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
“वोट बैंक की राजनीति से सावधान रहें लोग”
अंत में, मायावती ने जनता से अपील की कि वे कांग्रेस और भाजपा की वोट बैंक की राजनीति से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों का रवैया हमेशा से जातिवादी और बहुजन-विरोधी रहा है। जातिगत जनगणना को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज है। मायावती ने जहां केंद्र के फैसले का स्वागत किया, वहीं भाजपा और कांग्रेस दोनों को घेरा और बहुजन समाज को जागरूक रहने की सलाह दी।




