नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर राजनीतिक हलचल बढ़ाते हुए कहा कि राहुल गांधी को इंडिया गठबंधन (INDI) की कमान छोड़ देनी चाहिए और इसके नेतृत्व के लिए ममता बनर्जी, एम.के. स्टालिन, अखिलेश यादव या तेजस्वी यादव जैसे वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसा करने से गठबंधन को अधिक समय और ध्यान मिलेगा और छोटे दलों की हिस्सेदारी भी सुनिश्चित रहेगी।
अय्यर ने स्पष्ट किया कि “ममता दीदी के बिना INDI अलायंस का ‘I, N, D, I’ सब निकल जाएगा”। उनका तर्क है कि ममता बनर्जी इस गठबंधन की सबसे सक्रिय नेता हैं और उनके नेतृत्व में ही गठबंधन मजबूत और प्रभावी हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को शीर्ष पद पर बने रहने की बजाय इसे ऐसे नेता को सौंप देना चाहिए जो छोटे दलों और गठबंधन की जिम्मेदारियों को अधिक समय और ऊर्जा देकर संभाल सके। अय्यर ने उदाहरण के तौर पर ममता बनर्जी, स्टालिन, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव का नाम लिया।
मणिशंकर अय्यर का यह बयान ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं, खासकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले। अय्यर का बयान राजनीतिक हलचल का कारण बन गया, क्योंकि ममता बनर्जी गठबंधन से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं, अन्य प्रमुख नेता जैसे अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव भी राहुल गांधी को पूरी तवज्जो नहीं दे रहे हैं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर कांग्रेस में नेतृत्व और गठबंधन के भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है।
हालांकि, अय्यर के बयान पर कांग्रेस के अंदर विरोध भी सामने आया है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनके बयान की कड़ी निंदा की। कांग्रेस महासचिव सुमन रॉय चौधरी ने कहा कि अय्यर लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हैं और उनका बयान पार्टी की आधिकारिक राय नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी पर्दे के पीछे बीजेपी की कठपुतली की तरह काम कर रही हैं, जिसके खिलाफ INDI ब्लॉक लड़ रहा है, इसलिए अय्यर के व्यक्तिगत बयान को पार्टी की राय के रूप में नहीं लिया जा सकता।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अय्यर का बयान कांग्रेस और गठबंधन के लिए संकेतक है कि विभिन्न राज्य के दलों के बीच नेतृत्व और रणनीति को लेकर असहमति है। यह बयान विशेष रूप से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले आया है, जहां ममता बनर्जी की भूमिका और गठबंधन की रणनीति पर चर्चा जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस और INDI गठबंधन में नेतृत्व पर बहस को तेज़ कर दिया है। अय्यर के सुझाव से यह स्पष्ट है कि गठबंधन में सक्रिय नेतृत्व की जरूरत है और राहुल गांधी को नेतृत्व छोड़कर अन्य वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह बयान कांग्रेस और गठबंधन की रणनीति पर गहरा असर डाल सकता है और आगामी चुनावों में इसका प्रभाव देखा जाएगा।




