नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि घाट के सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर इस विरासत को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है। मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इतिहास की धरोहरों को नष्ट कर केवल अपनी नेम-प्लेट चिपकाने में लगे हैं। उनका कहना था कि इस तरह के कदम स्थानीय संस्कृति और धार्मिक महत्व को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे का PM मोदी पर हमला
मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर कड़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है। पहले कॉरिडोर निर्माण के दौरान छोटे-बड़े मंदिर और देवालय तोड़े गए, और अब प्राचीन घाटों की बारी है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इतिहास की धरोहरों को मिटाकर सिर्फ अपनी नेम-प्लेट चिपकाना चाहती है। उन्होंने पोस्ट में कुछ तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए, जिनमें बुलडोजर और टूटती मूर्तियां नजर आ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सदियों पुरानी मूर्तियों और मंदिरों को क्यों नहीं म्यूजियम में रखा गया। उन्होंने लिखा “लाखों लोग मोक्ष के लिए काशी आते हैं, क्या उनका इरादा भक्तों के साथ धोखा करना है?
मणिकर्णिका घाट : पुनर्विकास परियोजना के उद्देश्य
मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में सबसे पवित्र अंतिम संस्कार स्थलों में गिना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहां अंतिम संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह घाट वाराणसी के सबसे पुराने घाटों में शामिल है और इसका इतिहास माता सती के कर्णफूल से जुड़ा हुआ है।
इस घाट के पुनर्विकास की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को रखी थी। यह काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना का हिस्सा है और इसका उद्देश्य घाट को आधुनिक सुविधाओं के अनुरूप बनाना है। इस प्रोजेक्ट के तहत घाट को चौड़ा किया जाएगा, यात्रियों के लिए रैंप और बैठने की जगह बनाई जाएगी, VIP सुविधाएं उपलब्ध होंगी, लकड़ी बिक्री के लिए वुड प्लाजा तैयार किया जाएगा, साथ ही साफ-सफाई और बाढ़ सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाएगा। साथ ही स्किंदिया घाट से कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत 17.56 करोड़ रुपये है और इसे 2026 तक पूरा करने की योजना है। परियोजना में इको-फ्रेंडली तकनीक का इस्तेमाल करके लकड़ी की खपत और प्रदूषण को कम करने का प्रयास भी किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट को लेकर क्यों हो रहा विवाद?
इस प्रोजेक्ट को लेकर विवाद भी उठे हैं। स्थानीय लोग और कुछ विरोधी आरोप लगा रहे हैं कि निर्माण कार्य के दौरान सदियों पुरानी मूर्तियां और छोटे-बड़े मंदिर क्षतिग्रस्त हुए हैं। लेकिन जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी मंदिर या सांस्कृतिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा है और सभी को सुरक्षित रखकर बाद में बहाल किया जाएगा। वाराणसी कलेक्टर ने सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ चेतावनी भी जारी की है।





