नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप मामले को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि कोडीनयुक्त कफ सिरप 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए चिकित्सकीय रूप से प्रतिबंधित है। SIT की रिपोर्ट के मुताबिक कफ सिरप खुद अवैध नहीं है, लेकिन ड्रग माफियाओं ने इसका गलत इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नशे के उद्देश्य से कफ सिरप को बिना डॉक्टर की पर्ची के बाजार में बेचा गया। इसके लिए सुपर स्टॉकिस्ट से लेकर रिटेलर तक एक पूरी सप्लाई चेन बनाई गई थी।
अवैध डायवर्जन पर चला बड़ा अभियान
रिपोर्ट में बताया गया है कि यूपी सरकार ने इसी अवैध नेटवर्क के खिलाफ देश का सबसे बड़ा क्रैकडाउन चलाया। सिर्फ कफ सिरप ही नहीं, बल्कि सिडेटिव और स्लीपिंग पिल्स की अवैध बिक्री पर भी कार्रवाई की गई।
SIT के अनुसार, कफ सिरप की दवाइयां असली थीं, लेकिन पूरा मामला अवैध डायवर्जन और गैरकानूनी बिक्री से जुड़ा हुआ है।
नकली कफ सिरप का मामला अलग
रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौत तमिलनाडु में बनी नकली कफ सिरप के कारण हुई थी। इस मामले की जांच केंद्र सरकार कर रही है। SIT ने कहा कि तमिलनाडु की नकली कफ सिरप का मामला अलग है, लेकिन इसे लेकर उत्तर प्रदेश में भ्रम फैलाया गया।
सपा के गंभीर आरोप
विधानसभा सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कोडीन कफ सिरप का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह मामला पूरे प्रदेश में जाल की तरह फैला हुआ है और लंबे समय से चल रहा है। पांडेय ने दावा किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस पर संज्ञान लिया है और इसके सेवन से सैकड़ों बच्चों की मौत हुई है, साथ ही हजारों करोड़ रुपये का अवैध कारोबार हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के पास खुफिया एजेंसियां और इंटेलिजेंस सिस्टम मौजूद है, इसके बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। अगर पहले कदम उठाए जाते, तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।





