नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। साल 1982 में फिरोजाबाद के दिहुली में डकैतों के एक गिरोह ने दलितों के एक गांव में घुसकर धावा बोला दिया था। उन्होंने गांव में भारी गोलाबारी की। उस गोलाबारी में 24 दलितों की जान चली गई थी। मृतकों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल थे। मैनपुरी कोर्ट ने 11 मार्च को इस मामले में नामजद 3 आरोपियों को दोषी ठहराया था जिनकी सजा का आज ऐलान कर दिया गया है। कोर्ट ने तीनों आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और फांसी की सजा सुनाई।
44 साल बाद मिला इंसाफ
44 साल चले इस मुकदमें के बाद आज केस में फैसला सुना दिया गया है। कोर्ट ने इस नरसंहार को जघन्य अपराध माना है। सजा सुनाते हुए आदेश में लिखा गया कि दोषियों को फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए जब तक उनकी मौत न हो जाए। इस हत्याकांड के ज्यादार आरोपियों की मौत हो चुकी है। 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीद दायर की गई थी जिसमें से 13 की मौत हो चुकी है। जबकि 4 आरोपी फरार चल रहे हैं जिनके लिए कोर्ट ने उनके खिलाफ स्थाई वारंट जारी किया हुआ है।
नरसंहार के बाद इंदिरा गांधी ने किया था दौरा
दिहुली के इस दर्दनाक नरसंहार के बाद प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक पूरी तरह हिल गए थे। घटना की वीभत्सता इतनी भयावह थी कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी पीडितों का दर्द बांटने के लिए दिहुली आना पड़ा था। गृहमंत्री बीपी सिंह और सूबे के सीएम नारायण दत्त तिवारी के अलावा नेता विपक्ष अटल बिहारी वाजपेई ने भी क्षेत्र का दौरा किया था। चश्मदीद 90 साल की जय देवी ने अपना दर्द सुनाते हुए कहा कि न्याय मिलने में बहुत देरी हुई है। उन्होंने हमलावरों से छिपकर अपनी जान बचाई थी।




