नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मध्य प्रदेश सरकार ने बेरोजगारी की समस्या से निपटने का अनोखा तरीका अपनाया है। अब राज्य में बेरोजगार युवाओं को ‘आकांक्षी युवा’ कहा जाएगा। सरकार के अनुसार, इस बदलाव से युवाओं का मनोबल बढ़ेगा और वे खुद को बेरोजगार महसूस नहीं करेंगे।
मंत्री ने दिया नया तर्क
राज्य के कौशल विकास मंत्री गौतम टेटवाल ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि रोजगार कार्यालय में पंजीकृत होने वाले सभी युवा बेरोजगार नहीं होते। यदि कोई युवा अपने पिता की दुकान पर काम कर रहा है और रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत है, तो उसे बेरोजगार नहीं माना जाएगा।
युवाओं की क्या है राय?
सरकार के इस फैसले के बाद, हमने कुछ ‘आकांक्षी युवाओं’ से उनकी आकांक्षाओं के बारे में जाना। प्रकाश सेन ने कंप्यूटर साइंस में डिग्री ली, लेकिन आईटी क्षेत्र में नौकरी न मिलने के कारण अब चाय की दुकान चला रहे हैं। आर्यन श्रीवास्तव, जो कृषि में क्रांति लाने का सपना देख रहे थे, प्लेसमेंट और सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में असफलता के कारण घर पर बैठने को मजबूर हैं। शैलेन्द्र मिश्रा नौकरी के लिए कई फॉर्म भर चुके हैं, 36,000 रुपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। सोनली पटेल सालों से पुलिस भर्ती परीक्षा का इंतजार कर रही हैं, लेकिन अब तक उनका रिजल्ट नहीं आया।
विपक्ष का तंज
सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मजाक उड़ाया है। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि नाम बदलने से बेरोजगारी खत्म नहीं होती। उन्होंने तंज कसा कि “अब गरीबों को ‘अर्ध-धनवान’ और भिखारियों को ‘सड़क स्टार्टअप फाउंडर’ कहा जाएगा क्या?”
क्या नाम बदलने से बेरोजगारी खत्म होगी?
सरकार का कहना है कि यह कदम युवाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए है, लेकिन वास्तविकता यह है कि नए नाम से नौकरी नहीं मिलती। बेरोजगारों को नामकरण नहीं, बल्कि रोजगार की जरूरत है। विपक्ष का कहना है कि सरकार रोजगार देने में विफल हो रही है, इसलिए वह आंकड़े छुपाने के लिए ऐसे फैसले ले रही है। बेरोजगारों को ‘आकांक्षी युवा’ कहना केवल एक नामकरण बदलाव है, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि लाखों युवा अब भी रोजगार की तलाश में हैं। सरकार का यह फैसला उनका दर्द कम करेगा या नहीं, यह तो समय ही बताएगा!





