back to top
21.1 C
New Delhi
Thursday, March 12, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

आज लोकसभा स्पीकर का होगा चुनाव, BJP ने ओम बिड़ला तो कांग्रेस ने के. सुरेश को उतारा, किसका पलड़ा है भारी?

आज लोकसभा स्पीकर का सदन में चुनाव होगा। बीजेपी ने ओम बिड़ला को मैदान में उतारा है। तो वहीं कांग्रेस ने के. सुरेश को उतारा है। आइये जानते हैं किसका पलड़ा भारी है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क।  आज 26 जून को संसद सत्र का तीसरा दिन है। आज सदन में लोकसभा स्पीकर का चुनाव होगा। बीजेपी की तरफ से ओम बिड़ला को उम्मीदवार बनाया गया है। तो वहीं कांग्रेस की तरफ से के. सुरेश को उम्मीदवार बनाया गया है। दरअसल पक्ष और विपक्ष में सहमति नहीं बन पाई। जिसकी वजह से इस बार लोकसभा स्पीकर के लिए चुनाव होने हैं। आइये जानते हैं कि इस चुनाव में किसका पलड़ा भारी है?

दरअसल जिस पक्ष के पास ज्यादा सांसद हों उन्हीं का स्पीकर बनता है। इसलिए इसे सत्ता पक्ष का चुनाव कहा जाता है। 18वीं लोकसभा में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास संख्याबल ज्यादा है। इसलिए इस लिए ओम बिरला का चुनाव जीतना तय माना जा रहा है। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास 293 सांसद हैं तो वहीं INDIA गठबंधन के पास 234 सांसद हैं।

क्या मैसेज देना चाहती है कांग्रेस?

लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने जिस तरह से आक्रमकता दिखाई है। उस आक्रमकता को कांग्रेस और विपक्ष कम नहीं पड़ने देना चाहती है। इसलिए कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर के चुनाव में कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारकर ये मैसेज दे रही है कि इस बार बीजेपी की दाल गलने वाली नहीं है। उन्हें हर कदम फूंक-फूंककर उठाना होगा। 

क्यों खास है लोकसभा स्पीकर का पद?

लोकसभा के स्पीकर का पद सत्ता पक्ष की ताकत का प्रतीक माना जाता है। उसके पास लोकसभा के कामकाज का पूरा कंट्रोल होता है। वहीं डिप्टी स्पीकर का काम है कि लोकसभा स्पीकर की अनुपस्थिति में उनका काम उसी तरह से करना होता है। दरअसल सदन कैसे चलेगा और सदन में किसको कितना समय देना है ये लोकसभा स्पीकर ही तय करता है। संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत स्पीकर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करता है। यहीं नहीं लोकसभा में विपक्ष का नेता कौन होगा ये स्पीकर ही तय करता है।

स्पीकर की ये है जिम्मेदारी

स्पीकर का मुख्य काम सदन को नियम और कानूनी तरीके से चलाना है। संसद सदस्यों की शक्तियों और विशेषाधिकारों की रक्षा करना भी स्पीकर की ही जिम्मेदारी होती है। संसद से जुड़े किसी भी मामले में स्पीकर का फैसला सर्वोच्च होता है। इसके अलावा स्पीकर के फैसले को बदलने का सुप्रीम कोर्ट के पास भी सीमित अधिकार होता है।

संसद में किसी बिल या अहम मुद्दों पर कौन वोट कर सकता है और कौन नहीं जैसा कि अटल बिहारी के मामले में हमने देखा) का फैसला भी लोकसभा स्पीकर ही करता है। इसके अलावा सदन कब तक चलेगा और कब स्थगित करना है। इसका निर्णय भी इसी की जिम्मेदारी होती है। 1985 में दल बदल कानून को रोकने के लिए राजीव गांधी सरकार ने स्पीकर को काफी ज्यादा शक्तियां प्रदान की थी।

अन्य खबरों के लिए क्लिक करें:- www.raftaar.in

Advertisementspot_img

Also Read:

आंख और मुंह कितने सेंटीमीटर खुले? BJP पर जमकर गरजे अखिलेश यादव, कहा- सम्मान नहीं तो अपमान भी न करें

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रस्तावित कार्यक्रम को प्रशासन ने सशर्त अनुमति दे दी...
spot_img

Latest Stories

बालों ने कर दिया है परेशान, तो घर पर बनाए इन चीजों से सिरम

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। बाल औरत की खूबसूरती का...

Vastu Tips: आज गुरुवार के दिन करें ये उपाय, किस्मत का खुल जाएगा बंद ताला

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। आज गुरुवार का दिन बहुत...