नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश आज 8 नवंबर को देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी का जन्मदिन मना रहा है। लाल कृष्ण आडवाणी आज 97 साल के हो गए हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री समेत तमाम BJP नेताओं ने उन्हें शुभकानाएं दी। लाल कृष्ण आडवाणी देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिन्हें भारत रत्न के सम्मान से नवाजा गया है। BJP अगर आज सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी बनी है उसमें आडवाणी जी के योगदान को नजरअंदाज नही किया जा सकता। उनके एक किस्से के जरिए जानेंगे कि अपनी हाजिरजवाबी के लिए मशहूर अटल बिहारी वाजपेयी कैसै आडवाणी के सामने निरुत्तर हो गए।
लाल कृष्ण आडवाणी की घोषणा से हैरान रह गए थे अटल बिहारी वाजपेयी
साल 1996 के आम चुनाव को लेकर 11 से 13 नवंबर 1995 को BJP का महाधिवेशन चल रहा था। पार्टी के बड़े बड़े नेता अधिवेशन में मौजूद थे। लाल कृष्ण आडवाणी उस समय BJP के अध्यक्ष थे। उन्होंने अधिवेशन को संबोधित करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी की लीडरशिप में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया और उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस घोषणा के बाद क्या अटल बिहारी वाजपेयी क्या कार्यकर्ता सब चौंक गए। अटल बिहारी वाजपेयी भी कुछ समय के लिए अपने कानों पर यकीन नहीं कर पाए थे क्योंकि यह माना जा रहा था कि अगर भाजपा सरकार बनाएगी तो आडवाणी ही प्रधानमंत्री बनेंगे।
लाल कृष्ण आडवाणी के सामने निरुत्तर हो गए थे अटल
इस घोषणा के बाद अटल बिहारी वाजपेयी तुरंत लाल कृष्ण आडवाणी के पास पहुंचे और कहा कि “यह क्या घोषणा कर दी आपने, घोषणा से पहले मुझसे तो बात कर लेते आप”। इसका जवाब देते हुए आडवाणी ने कहा कि अगर मैं आपसे बात करता तो क्या आप इस बात के लिए मानते। उनके इस फैसले पर RSS ने भी कहा कि घोषणा से पहले संघ से अनुमति लेनी चाहिए थी। इसका जवाब आडवाणी ने यह कहकर दिया कि “संघ इस बात के लिए कभी नहीं मानता”।





