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लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल सोमवार को अगत्ती पहुंचेंगे

तिरुवनंतपुरम, 13 जून (आईएएनएस)। लक्षद्वीप के आधुनिकीकरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच, केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल सोमवार को द्वीपों पर पहुंचेंगे और 20 जून तक वहां रहेंगे। लक्षद्वीप बचाओ फोरम, स्थानीय कार्यकर्ताओंऔर विपक्षी राजनेताओं का एक छत्र समूह, जो प्रशासक के नए सुधारों के खिलाफ आंदोलन में सबसे आगे है, पहले ही घोषणा कर चुका है कि वह द्वीपों में विरोध मार्च करेगा। जबसे गुजरात के पूर्व गृहमंत्री, पटेल ने प्रशासक के रूप में पदभार ग्रहण किया है, उनके कामकाज की शैली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि वह द्वीप की संस्कृति को नष्ट करने पर आमादा हैं। प्रशासक के कार्यालय ने इस आरोप का खंडन किया है। लक्षद्वीप के जिला कलेक्टर एस. असकर अली ने आईएएनएस को बताया कि प्रशासक सोमवार को पहुंच रहे हैं और रविवार तक वहीं रहेंगे। वह अगत्ती, कवरत्ती, मिनिकॉय, एंड्रोथ और कल्पेनी द्वीपों में बिजली क्षेत्र, अस्पतालों और स्कूलों में कई परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। जबकि केरल के संसद सदस्यों ने प्रशासक से याचिका दायर की थी कि उन्हें लागू किए जा रहे नए उपायों पर प्रत्यक्ष अध्ययन करने के लिए द्वीपों का दौरा करने की अनुमति दी जाए। वहीं लक्षद्वीप की मूल निवासी फिल्म निर्माता आयशा सुल्ताना पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया है, क्योंकि उन्होंने एक टेलीविजन चैनल में चर्चा के दौरान कहा था कि केंद्र सरकार ने लक्षद्वीप के लोगों पर जैव हथियार का इस्तेमाल किया। सुल्ताना ने बाद में एक बयान में सफाई दी थी कि टेलीविजन डिबेट में बोलते समय उन्हें नेटवर्क की कुछ समस्याएं थीं और उन्होंने पटेल के लिए बायो वेपन शब्द का इस्तेमाल किया था। लक्षद्वीप में मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है, और उनके समर्थन में आकर, केरल के राजनीतिक नेताओं और दलों ने राज्यभर में कई विरोध मार्च आयोजित किए हैं और एर्नाकुलम में अपने कार्यालय के सामने प्रशासक का पुतला जलाया है। माकपा सांसद एलाराम करीम ने आईएएनएस से कहा, लक्षद्वीप के प्रशासक बड़े पैमाने पर कुछ योजना बना रहे हैं जो द्वीप की संस्कृति और इस शांत जगह के लोगों के जीवन को नष्ट कर देगा। यह एक अत्यधिक पर्यावरण संवेदनशील स्थान है और अत्यधिक नाजुक है और विशाल रिसॉर्ट्स जैसे किसी भी निर्माण का क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रशासक एक तानाशाह की तरह काम कर रहा है और लक्षद्वीप के लोगों की आवाज नहीं सुन रहा है। –आईएएनएस एमएसबी/एसजीके

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