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Sunday, March 8, 2026
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प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने इटावा कथावाचक विवाद को बताया बेबुनियाद, संत समाज की चुप्पी पर जताई चिंता

इटावा कथावाचक विवाद पर कुमार विश्वास ने कहा कि आस्था और भक्ति को जाति के दायरे में बांधना गलत है। कथावाचक का काम भगवान और भक्तों के बीच सेतु बनाना है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । उत्तर प्रदेश के इटावा में कथावाचक से जुड़ा विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। यह मसला अब केवल धार्मिक सीमाओं तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है। इसी बीच प्रसिद्ध कवि और विचारक डॉ. कुमार विश्वास ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी दो टूक राय रखी है।

क्‍या बोले कुमार विश्‍वास ?

निजी मीडिया चैनल के एक विशेष कार्यक्रम में बोलते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि “आस्था और भक्ति को जाति जैसे संकीर्ण दायरे में समेटना न केवल अनुचित है, बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी हानिकारक है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि एक कथावाचक का कर्तव्य समाज में आध्यात्मिक सेतु का निर्माण करना है, न कि वर्गभेद को बढ़ावा देना। इस पूरे प्रकरण को उन्होंने “बिल्कुल अनावश्यक विवाद” करार दिया और समाज से जातिगत सोच से ऊपर उठकर धर्म की सच्ची भावना अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे विवाद धार्मिक आयोजनों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं और भक्ति के माहौल में कटुता घोलते हैं।

कुमार विश्वास ने यह सवाल भी उठाया कि इस मुद्दे पर कई प्रमुख कथावाचकों और संतों ने अब तक चुप्पी साध रखी है, जो चिंताजनक है। उनकी इस टिप्पणी को सोशल मीडिया पर खासा समर्थन मिल रहा है।

क्‍या है इटावा का कथावाचक विवाद ? 

21 जून को इटावा जिले के दांदरपुर गांव में आयोजित एक भागवत कथा के दौरान अचानक विवाद उस वक्त भड़क उठा जब कथावाचक मुकुट मणि यादव और संत सिंह यादव के खिलाफ ग्रामीणों ने जातीय पहचान छुपाने और अनुचित आचरण के आरोप लगाए। आरोपों के अनुसार, दोनों कथावाचकों ने अपनी वास्तविक जाति (यादव) छिपाकर ब्राह्मण के रूप में कथा का आयोजन किया, जिससे कार्यक्रम के यजमानों और स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई।

घटना के बाद कथावाचकों के साथ मारपीट हुई, और कथित तौर पर उनकी चोटी काटी गई। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने व्यापक रूप ले लिया। वहीं कथा की यजमान रेनू तिवारी ने कथावाचक मुकुट मणि यादव पर छेड़खानी का भी आरोप लगाया है।

पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया और कथावाचकों के खिलाफ फर्जी पहचान पत्र और धोखाधड़ी के आरोपों में FIR दर्ज की। वहीं, इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे जातिवाद से प्रेरित हमला बताया है, जबकि ब्राह्मण महासभा ने कथावाचकों की भूमिका की जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच झांसी पुलिस को सौंपी है। पूरे विवाद ने प्रदेश में जातीय तनाव और राजनीतिक बयानबाजी को और हवा दे दी है।

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