कोच्चि, 9 जुलाई (आईएएनएस)। केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य में जिस तरह से क्राउडफंडिंग हो रही है, उस पर चिंता व्यक्त की और अपना खाता नंबर देकर चैरिटी के पैसे जुटाने वाले यूट्यूबर्स के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने केरल सरकार से पूछा कि क्या उनके पास क्राउडफंडिंग के संबंध में कोई नीति है और कहा कि अगर उनके पास नहीं है, तो उन्हें फ्लोटिंग पर भी विचार करना चाहिए। अदालत ने यह टिप्पणी जिले के मलप्पुरम के एक माता-पिता द्वारा हस्तक्षेप करने के लिए अदालत से संपर्क करने के बाद की, ताकि एक बहुत ही दुर्लभ बीमारी से पीड़ित उसके बच्चे को सरकारी इलाज मिल सके। अदालत ने यह भी कहा कि क्राउडफंडिंग के लिए एक उचित ढांचा होना चाहिए और सरकार को प्रहरी के रूप में कार्य करना चाहिए, क्योंकि यह सभी के लिए मुफ्त नहीं होना चाहिए, जो धन आता है और जहां जाता है उसका स्रोत उचित होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो लोग दान के लिए दान करते हैं उनके साथ धोखा नहीं होना चाहिए। पिछले सप्ताह सोमवार को कुछ ही दिनों में केरल के 1.5 वर्षीय बच्चे मोहम्मद के इलाज के लिए क्राउडफंडिंग के माध्यम से 18 करोड़ रुपये की एक चौंका देने वाली राशि जुटाई गई। बच्चा एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था जिसे स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी कहा जाता है, जिससे मांसपेशियां बर्बाद हो जाती हैं। अदालत ने कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि केरलवासियों की दयालुता का फायदा उठाया जा सकता है और केवल सरकार ही एक प्रणाली के माध्यम से इसमें किसी भी तरह की धोखाधड़ी को होने से रोक सकती है। –आईएएनएस एचके/एएनएम




