back to top
31.6 C
New Delhi
Sunday, April 5, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

कर्नाटक के सीएम: हम मेकेदातु परियोजना के साथ आगे बढ़ेगे

बेंगलुरु, 5 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के प्रस्तावित मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना के विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने गुरुवार को कहा कि तमिलनाडु राजनीति के लिए मेकेदातु परियोजना का विरोध कर रहा है। यहां विधान सौध में अधिकारियों के साथ बैठक के बाद बोम्मई ने संवाददाताओं से कहा कि मेकेदातु परियोजना पर कोई समझौता नहीं होगा क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद कर्नाटक इसे शुरू करेगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, तमिलनाडु में जो लोग विरोध कर रहे थे, वे राजनीतिक कारणों से ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के दौरान यह परियोजना दोनों राज्यों के लिए फायदेमंद साबित होगी। उन्होंने कहा, हमने पहले ही एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है और इसे हाल ही में जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को सौंप दिया है। मुझे विश्वास है कि डीपीआर को केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाएगा और इसके तुरंत बाद परियोजना को शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा और इसमें कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, अगर कोई विरोध कर रहा है तो हमें इसकी चिंता नहीं है और हम इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। प्रस्तावित मेकेदातु (बकरी की छलांग) जलाशय परियोजना का निर्माण रामनगर जिले में कावेरी नदी और उसकी सहायक अर्कावती के संगम पर एक गहरी खाई में करने का प्रस्ताव है। कर्नाटक की कावेरी नीरावरी निगम लिमिटेड द्वारा मेकेदातु संतुलन जलाशय और पेयजल परियोजना की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट के अनुसार, 1948 से मेकेदातु परियोजना से बिजली विकसित करने की संभावना की जांच की जा रही है। हालांकि, इस परियोजना को 2013 में ही पुनर्जीवित किया गया था जब इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार द्वारा सैद्धांतिक रूप से मंजूरी मिली थी, जिसके बाद राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय जल आयोग को एक पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। इस योजना के अनुसार, जलाशय की क्षमता लगभग 67 टीएमसीएफटी पानी की होगी और इसका उद्देश्य बेंगलुरु और पड़ोसी क्षेत्रों में पेयजल सुनिश्चित करना है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद 400 मेगावाट बिजली पैदा करने की भी परिकल्पना की गई है। कावेरी जल बंटवारा विवाद दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद शीर्ष अदालत ने 2018 में अपना अंतिम फैसला सुनाया और कर्नाटक को आवंटन बढ़ा दिया। इस अंतिम फैसले के अनुसार, कर्नाटक को 284.75 टीएमसीएफटी पानी, तमिलनाडु को 404.25 टीएमसीएफटी, केरल को 30 टीएमसीएफटी, पांडिचेरी को 7 टीएमसीएफटी और 14 टीएमसीएफटी पर्यावरण संरक्षण और समुद्र में अपव्यय के लिए आरक्षित किया जाएगा। –आईएएनएस एचके/आरजेएस

Advertisementspot_img

Also Read:

छुट्टी रद्द होते ही GenZ कर्मचारी का अनोखा रिएक्शन, एयरपोर्ट से बोलीं- अब 10 दिन बाद ही खुलेगा लैपटॉप

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । सोचिए, आप फ्लाइट पकड़ने ही वाले हों और तभी ऑफिस से मैसेज आए कि आपकी छुट्टियां रद्द कर दी गई...
spot_img

Latest Stories

Credit Card tips: क्रेडिट कार्ड यूज करते समय न करें ये गलतियां, वरना बढ़ सकता है कर्ज का बोझ

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आज के समय में क्रेडिट कार्ड...

RCB vs CSK Live Streaming: कब, कहां और कैसे देखें हाई-वोल्टेज मुकाबला, यहां जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आज के दिन के डबल हेडर...

SRH vs LSG: हेड-टू-हेड में किसका दबदबा? आंकड़े देखकर हो जाएंगे हैरान

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में...

Company Secretary क्या होता है? जानें कैसे बनाएं इस फील्ड में करियर

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। यह बात स्वभाविक है कि आज...

Kolkata Port सीट पर कड़ा मुकाबला: TMC, BJP, कांग्रेस और वाम के बीच चौतरफा लड़ाई

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कोलकाता...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵