नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए भगदड़ कांड की न्यायिक जांच रिपोर्ट गुरुवार को विधानमंडल में पेश की गई। इस हादसे में कुल 121 लोगों की मौत हो गई थी। रिपोर्ट में सत्संग आयोजकों को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है, जबकि सत्संग करने वाले भोले बाबा को क्लीन चिट दी गई है।
पुलिस की लापरवाही भी उजागर
सूत्रों के मुताबिक, न्यायिक जांच आयोग ने पुलिस की लापरवाही को भी हादसे का एक कारण माना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों को हर बड़े आयोजन स्थल का भ्रमण करना चाहिए और आयोजकों की ओर से ली गई अनुमति की शर्तों को सख्ती से लागू करना चाहिए।
भविष्य के लिए दिए गए सुझाव
भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस और प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी होगी,आयोजकों को दी गई अनुमति की शर्तों का सख्ती से पालन करवाया जाए। यदि कोई आयोजक नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने की। इस आयोग को जांच कर यह पता लगाना था कि हादसे के पीछे किसी साजिश का हाथ तो नहीं था।
क्या था पूरा मामला?
2 जुलाई 2024 को हाथरस के सिकंदराराऊ क्षेत्र में गांव फुलरई मुगलगढ़ी में नारायण साकार हरि भोले बाबा उर्फ सूरजपाल के सत्संग के दौरान भगदड़ मच गई थी। बताया जाता है कि बाबा के काफिले को निकालने के लिए सेवादारों ने भीड़ को रोक दिया था, जिसके चलते लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में 121 लोगों की जान चली गई।इस मामले में मुख्य सेवादार देवप्रकाश मधुकर सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या, गंभीर चोट पहुंचाने, निषेधाज्ञा के उल्लंघन और साक्ष्य छिपाने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। न्यायिक जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि हादसे के लिए आयोजक और पुलिस प्रशासन की लापरवाही जिम्मेदार है। रिपोर्ट में सुझाव दिए गए हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाए और उल्लंघन पर कार्रवाई की जाए।
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