नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। जेपी नड्डा का जन्म 2 दिसंबर 1960 को पटना बिहार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली पढ़ाई पटना के सेंट जेवियर्स स्कूल से की, फिर पटना कॉलेज (पटना विश्वविद्यालय) से बीए और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से एलएलबी की डिग्री हासिल की। बचपन और जवानी के दिन बिहार में बिताने वाले नड्डा ने बाद में हिमाचल को अपना गृह राज्य माना यही वह भूमि रही, जहाँ उन्होंने राजनीति का पहला सुनहरा मोड़ देखा।
छात्र राजनीति से शुरुआत – ABVP से राष्ट्रीय मंच तक
1970-80 के दशक में वे छात्र राजनीति में उतरे; उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपनी शुरुआती राजनीतिक सक्रियता शुरू की। 1977 में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के सचिव बने यह नड्डा का पहला राजनीतिक पद था। आगे चलकर उन्होंने 1980 में ABVP के राष्ट्रीय स्तर पर काम किया, और अंतत 1989 में राष्ट्रीय सचिव बने। यह उनके राजनीतिक करियर में बड़ा बदलाव था।
हिमाचल में विधायक, मंत्री और संगठन-कार्यक्षेत्र
1993 में हिमाचल प्रदेश विधान सभा का चुनाव जीतकर विधायक बने। उसके बाद 1998–2003 और 2007–2012 तक दो और बार विधायक चुने गए। 1998–2003 के दौरान उन्होंने हिमाचल सरकार में स्वास्थ्य व परिवार कल्याण एवं संसदीय मामलों के मंत्री के रूप में कार्य किया। उसके बाद 2008–2010 तक वन, पर्यावरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग में मंत्री रहे। इस तरह संगठन-सेवा और प्रशासन दोनों में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। अप्रैल 2012 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया, जिससे उनका दायरा केवल हिमाचल तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचा। 2014 में, जब नरेंद्र मोदी की सरकार बनी, तब नड्डा को केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। 17 जून 2019 को उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया और 20 जनवरी 2020 को उन्हें पूर्ण अध्यक्ष चुना गया यानी उन्होंने एक साधारण छात्र नेता से लेकर पार्टी के सर्वोच्च पद तक का सफर तय किया।




