back to top
20.1 C
New Delhi
Saturday, March 21, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

जयराम रमेश ने एडविन अर्नोल्ड की पुस्तक द लाइट ऑफ एशिया को दिया शानदार ट्रिब्यूट (पुस्तक समीक्षा)

नई दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। अर्थशास्त्री, लेखक, राजनेता जयराम रमेश ने सन 1879 में मूल रूप से प्रकाशित एडविन अर्नोल्ड्स की पुस्तक द लाइट ऑफ एशिया की असंख्य बारीकियों का श्रमसाध्य रूप से अनावरण किया है। इस किताब ने बुद्ध के जीवन पर दुनिया भर के लोगों के विचारों को आकार देने के लिए बहुत अहम भूमिका निभाई है। इसने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद और यहां तक कि विंस्टन चर्चिल, के साथ पांच नोबेल पुरस्कार विजेताओं पर भी गहरा प्रभाव डाला है। जयराम रमेश द लाइट ऑफ एशिया, पोएम डैट डिफाइन्ड द बुद्धा (पेंगुइन, वाइकिंग) में लिखते हैं कि द लाइट ऑफ एशिया का 13 यूरोपीय, आठ उत्तर और दक्षिण पूर्व एशियाई और 14 दक्षिण एशियाई भाषाओं में अनुवाद किया गया है। विभिन्न देशों में कई नाटकों, नृत्य नाटकों और ओपेरा में इसे रूपांतरित किया गया है। पिछले पचास वर्षों में, इसने अकादमिक रुचि पैदा करना जारी रखा है और यूके, कनाडा, यूएसए और जर्मनी में डॉक्टरेट शोध प्रबंध और विद्वानों के प्रकाशनों का विषय बन गया है। रमेश कहते हैं, अर्नोल्ड की पुस्तक ने बुद्ध के जीवन के बारे में दुनिया भर के लोगों के विचारों को आकार देने के लिए बहुत कुछ किया। इसके प्रकाशन के बाद के वर्षों तक इसके लिए एक उन्माद था। इसके लेखक कोई महान विद्वान नहीं थे, लेकिन उन्होंने वह हासिल किया जो कोई भी विद्वतापूर्ण कार्य नहीं कर सका। इसका पश्चिमी दुनिया पर प्रभाव, कम से कम बीसवीं शताब्दी की पहली तिमाही के अंत तक, पहचाना और लिखा गया है लेखक ने कहा, यूके और यूएसए के बाहर, विशेष रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में इसकी स्थायी अपील को बहुत कम समझा और सराहा गया है। इस अपील ने अलग अलग तरीकों प्रमुख सार्वजनिक हस्तियों पर इसके प्रभाव के माध्यम से, कई भाषाओं में अनुवाद के माध्यम से और इसके उपयोग के माध्यम से, विविध कला रूपों में काम किया। । इसने समाज सुधारकों को प्रेरित किया और बौद्धों को बुद्ध के ज्ञानोदय के स्थल के प्रबंधन में समान रूप से शामिल करने के लिए प्रेरित किया, जो उनके पास कई सदियों से नहीं था इस पुस्तक का दुनिया भर के कम से कम 11 साहित्यिक व्यक्तित्वों पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ा। उनमें से पांच नोबेल पुरस्कार विजेता थे, रुडयार्ड किपलिंग, रवींद्रनाथ टैगोर, डब्ल्यू.बी. येट्स, इवान बुनिन और टी.एस. एलियट द्वारा 1948 में किया गया था। अन्य छह महान हस्तियां, हरमन मेलविल, लियो टॉल्स्टॉय, लाफ्काडियो हर्न, डी.एच. लॉरेंस, जॉन मेसफील्ड और जोस लुइस बोर्गेस है। इसने बाद में तुलनात्मक पौराणिक कथाओं पर दुनिया के अग्रणी अधिकारियों में से एक बनने के लिए जोसेफ कैंपबेल के लिए नई सीमाएं खोलीं। विज्ञान और उद्योग जगत भी इसकी पहुंच से अछूता नहीं है। रमेश लिखते हैं कि 1925 में, इसने जर्मन भारतीय टीम द्वारा बनाई गई भारत की पहली मूक फिल्मों (द लाइट ऑफ एशिया) में से एक के आधार के रूप में काम किया था। 1945 में यह एक हॉलीवुड क्लासिक, द पिक्च र ऑफ डोरियन ग्रे में दिखाई दी। वहीं 1957 में, बहुत बीमार ब्रिटिश अमेरिकी जासूसी कहानीकार रेमंड चांडलर को अपने लंबे समय तक रहे सचिव से एक पत्र मिला, जिसमें उन्हें इस पुस्तक को पढ़ने की सलाह दी गई थी। –आईएएनएस एमएसबी/आरजेएस

Advertisementspot_img

Also Read:

चीन का बयान, पुतिन के भारत दौरे से मजबूत होगा भारत-रूस-चीन त्रिपक्षीय सहयोग

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे पर चीन ने पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए इसे सकारात्मक बताया है। चीनी...
spot_img

Latest Stories

प्रमुख देवताओं में से एक हैं Bhagwan Vishnu, जानिए पालनहार का दिव्य रूप और अवतार

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) हिंदू...

जतिन नाम का मतलब- Jatin Name Meaning

Meaning of Jatin /जतिन नाम का मतलब :Ascetic/तपस्वी Origin /...

Navratri में बना रही हैं साबूदाना की खिचड़ी, तब उपयोग करें इस रेसिपी का

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। नवरात्रि (Navaratri) के दौरान व्रत...

Salman khan की फिल्म मातृभूमि कब होगी रिलीज? सामने आया बड़ा अपडेट

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। सलमान खान (Salman khan) की...

मार्च के बदलते मौसम में बढ़ सकता है फ्लू का खतरा, बचाव के लिए करें ये काम

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मार्च और अप्रैल के महीने...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵