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Sunday, April 5, 2026
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अंतिम कक्षा में पहुंचा ISRO का कम्युनिकेशन सैटेलाइट, ब्रॉडबैंड और फ्लाइट कनेक्टिविटी बनेगी बेहतर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का उन्नत संचार उपग्रह जीसैट-एन 2 इसरो की योजना के अनुरूप ही अपनी अंतिम भूस्थिर कक्षा में सफलता के साथ पहुंच गया है।

चेन्नई / रफ्तार डेस्‍क । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का उन्नत संचार उपग्रह जीसैट-एन 2 इसरो की योजना के अनुरूप ही अपनी अंतिम भूस्थिर कक्षा में सफलता के साथ पहुंच गया है। इस संचार उपग्रह के बारे में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने बताया कि यह एक सप्ताह के भीतर 68 डिग्री पूर्वी देशांतर के अपने अंतिम कक्षीय स्लॉट की ओर धीरे-धीरे बढ़ता दिख रहा है। रॉकेट ने अंतरिक्ष यान को 250 किमी की परिधि, 59,730 किमी की अपोजी और 27.5 डिग्री के कक्षीय झुकाव के साथ एक सुपर जियो-सिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में रखा गया है । प्रारंभिक डेटा ने उपग्रह के अच्छे स्वास्थ्य और स्थिरता की पुष्टि की।

संचार उपग्रह जीसैट-एन2 को लेकर इसरो द्वारा यह बताया गया है कि 4700 किलोग्राम वजन वाला एक उच्च-थ्रूपुट उपग्रह (एचटीएस) यह है जो का-का बैंड में काम करता है जिसकी क्षमता 48 जीबीपीएस है। खासतौर से इसे इसरो ने पूरे भारत में ब्रॉडबैंड और इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया है। इस उपग्रह में 32 स्पॉट बीम हैं जो अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह के दूरदराज के क्षेत्रों सहित पूरे देश में को यह अपनी सीमा में लेने में सक्षम हैं। इस उपग्रह को यूआर राव सैटेलाइट सेंटर द्वारा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के लिए अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, इसरो से संचार पेलोड के साथ विकसित किया गया था।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की मानें तो जीसैट-एन2 उपग्रह एनएसआईएल द्वारा शुरू किया गया दूसरा मांग-संचालित संचार उपग्रह मिशन है। जीसैट-एन2 को गत 19 नवंबर को अमेरिका के फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से फाल्कन-9 रॉकेट पर सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। 

इसरो ने कहा कि उपग्रह आने वाले दिनों में संचार पेलोड के संचालन और प्रदर्शन को सत्यापित करने के लिए ग्राउंड संचार बुनियादी ढांचे के साथ-साथ विस्तृत इन-ऑर्बिट परीक्षण (आईओटी) से गुजरेगा। आगे आनेवाले समय में इसके सफल परीक्षण के बाद परिचालन सेवाओं के व्‍यवस्‍थ‍ित रूप से शुरू होने को लेकर बताया जा रहा है कि इस उपग्रह के 68 डिग्री पूर्वी देशांतर से शुरू होने की उम्मीद है।

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