नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मध्य प्रदेश में इंदौर के दूषित पानी मामले की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि अब खरगोन जिले से एक और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां नर्मदा नदी के किनारे करीब 200 तोतों की मौत हो गई है। बड़वाह क्षेत्र में नर्मदा नदी पर बने एक्वाडक्ट पुल के आसपास बीते चार दिनों से लगातार तोतों के शव मिल रहे हैं, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
बर्ड फ्लू की अफवाह, पोस्टमार्टम में इनकार
इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत के बाद इलाके में बर्ड फ्लू को लेकर दहशत फैल गई थी। हालांकि, राहत की बात यह रही कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार, तोतों की मौत खाद्य विषाक्तता (फूड पॉइजनिंग) की वजह से हुई है। जिला वन्यजीव वार्डन टोनी शर्मा ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान कुछ तोते जीवित मिले थे, लेकिन उनके शरीर में ज़हर का असर इतना ज़्यादा था कि वे कुछ ही समय में दम तोड़ बैठे। इससे साफ है कि भोजन में मौजूद विषाक्तता बेहद घातक थी।
नमूने जांच के लिए जबलपुर भेजे गए
अधिकारियों ने बताया कि मृत तोतों के विसरा (अंदरूनी अंगों) के नमूने आगे की जांच के लिए जबलपुर भेजे गए हैं। बीते चार दिनों से पशु चिकित्सा विभाग, वन विभाग और वन्यजीव शाखा की टीमें मौके पर लगातार निगरानी कर रही हैं। पोस्टमार्टम करने वाली पशु चिकित्सक डॉ. मनीषा चौहान ने बताया कि तोतों में फूड पॉइजनिंग के साफ लक्षण पाए गए हैं और बर्ड फ्लू से जुड़ा कोई संकेत नहीं मिला। वहीं, पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी डॉ. सुरेश बघेल ने कहा कि मृत तोतों के पेट में चावल और छोटे कंकड़ पाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, तोतों की मौत के पीछे कई कारण हो सकते हैं, कीटनाशक छिड़के गए खेतों में दाना चुगना, नर्मदा नदी का दूषित पानी पीना पर्यटकों द्वारा पुल पर पक्षियों को पका हुआ या बचा हुआ खाना खिलाना डॉक्टरों ने कहा कि लोग अनजाने में ऐसा भोजन खिला देते हैं, जो पक्षियों के पाचन तंत्र के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है।




