नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक ने एफएटीएफ अध्यक्ष मार्कस प्लीयर को एक पत्र लिखकर देश को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) को ग्रे लिस्ट में रखने में भारत की भूमिका की जांच की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री इमरान खान को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें उनसे एफएटीएफ के भेदभाव और पाकिस्तान के लगातार उत्पीड़न के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में याचिका दायर करने का आग्रह किया गया है। एफएटीएफ अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में, मलिक ने सच्चाई को उजागर करने के लिए एफएटीएफ की एक विशेष टीम द्वारा भारतीय विदेश मंत्री के इकबालिया बयान की जांच करने का आह्वान किया। मलिक इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड रिफॉर्म्स के अध्यक्ष भी हैं। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखने के पीछे भारत का हाथ है, कुछ देशों के राजनीतिक दबाव और प्रभाव के कारण एफएटीएफ पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं कर रहा है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक मलिक ने कहा कि भारतीय विदेश मंत्री के कबूलनामे ने एफएटीएफ की अखंडता और पारदर्शिता पर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है और पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने में भारत की संलिप्तता की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से, एफएटीएफ ने उसकी तटस्थता साबित करने के लिए भारतीय मंत्री के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। पत्र में कहा गया है, आतंकवाद के वित्तपोषण, धन शोधन और यहां तक कि परमाणु प्रसार के जघन्य अपराधों में शामिल होने के स्पष्ट सबूतों के बावजूद, भारत को बख्शा जा रहा है और एफएटीएफ द्वारा इसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ विरोधी देश एफएटीएफ को एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि पाकिस्तान को गलत मंशा से दबाव में लाया जा सके। –आईएएनएस आरएचए/आरजेएस





