back to top
32.1 C
New Delhi
Thursday, March 12, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Independence Day 2025: महात्‍मा गांधी ने तिरंगे को सलामी देने से क्‍यों किया था मना, ये रही खास वजह?

भारत के इतिहास में आजादी को लेकर कड़ी लड़ाईयां लड़ी गई और कई घटनाएं हुई हैं। इसमे एक घटना ये भी है कि एक बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देने से मना कर दिया था।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । भारत आज 15 अगस्‍त को 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, देश में हर साल 15 अगस्त के दिन आजादी का जश्न मनाया जाता है। इस दिन भारत अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हो गया था। यानी 15 अगस्‍त को देश अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हो गया था। इस लिए हर साल 15 अगस्‍त को देशवासी आजादी का जश्‍न मनाते है और यह दिन देशवासियों के लिए बेहद खास है।

भारत के इतिहास में आजादी को लेकर कई लड़ाईयां लड़ी गई और कई घटनाएं हुई है। इसमे एक घटना ये भी है कि एक बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सलामी देने से मना कर दिया था। आज हम आपको बताएंगे गांधी जी ने ऐसा क्यों किया?

तिरंगे के डिजाइन को गांधी जी ने दी मंजूरी

भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा आज देश की शान है। देश का ये तिरंगा हमारे लिए गर्व का भी प्रतीक है। इसमें तीन रंग केसरिया, सफेद और हरा है। बीच में अशोक चक्र देश की एकता, शांति और प्रगति का संदेश देते हैं। लेकिन क्या ये बात आप जानते है कि, आजादी के समय तिरंगे को लेकर एक बड़ा विवाद हुआ था, जिसमें खुद महात्मा गांधी शामिल थे? 

तिरंगे के डिजाइन में बदलाव का फैसला 

उस दौरान, 1931 में महात्‍मा गांधी जी ने तिरंगे के डिजाइन को अपनी मंजूरी दी। और फिर इसे कांग्रेस के अधिवेशनों में फहराया जाता था। लेकिन 1947 में संविधान सभा ने तिरंगे के डिजाइन में बदलाव का फैसला किया। सभा में तिरंगे का डिजाइन बदलने के लिए प्रस्‍ताव रखा गया था। गांधी जी इस फैसले के खिलाफ थे। 

धर्म चक्र के खिलाफ थे गांधी जी, खुलकर जाहिर की नाराजगी

पिंगली वेंकैया के द्वारा डिजाइन किए गए नए तिरंगे में चरखे की जगह सम्राट अशोक के धर्म चक्र को शामिल किया गया। इस बदलाव से गांधी जी बहुत दुखी हुए। उस वक्त गांधी जी लाहौर में थे। संविधान सभा में कुछ गैर-कांग्रेसी सदस्यों ने तर्क दिया कि चरखा कांग्रेस पार्टी का प्रतीक है और राष्ट्रीय ध्वज में इसे शामिल करना उचित नहीं होगा। गांधी जी ने इस बदलाव का विरोध किया और अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।

गांधी जी ने बताया चरखे का मतलब

इस दौरान गांधी जी ने कहा था कि, ‘मैं इस झंडे को सलामी नहीं दूंगा, जिसमें चरखा नहीं है।’ उनका मानना था कि चरखा केवल सूत कातने का उपकरण नहीं, ये न केवल गरीबों को रोजगार और आमदनी मुहैया करा रहा था बल्कि ये मानवीयता, सादगी और किसी को कष्ट ना देने के अलावा गरीबों और अमीरों के बीच अटूट बंधन का प्रतीक भी था।

अहिंसा और धर्म का प्रतीक है अशोक चक्र

 हालांकि, इस समय जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल ने गांधी जी को समझाने की कोशिश की कि अशोक चक्र भी अहिंसा और धर्म का प्रतीक है, जो भारत की प्राचीन संस्कृति को दर्शाता है। अंत में, गांधी जी ने इस नए डिजाइन को स्वीकार किया। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने तिरंगे को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया और 15 अगस्त 1947 को यह पहली बार स्वतंत्र भारत में लहराया।

Advertisementspot_img

Also Read:

छुट्टी रद्द होते ही GenZ कर्मचारी का अनोखा रिएक्शन, एयरपोर्ट से बोलीं- अब 10 दिन बाद ही खुलेगा लैपटॉप

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । सोचिए, आप फ्लाइट पकड़ने ही वाले हों और तभी ऑफिस से मैसेज आए कि आपकी छुट्टियां रद्द कर दी गई...
spot_img

Latest Stories

इच्छामृत्यु पर बनी इन फिल्मों को देखकर रह जाएंगे हैरान, जानिए लिस्ट

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। आपको बता दें कि, इस...

LPG Cylinder Consumption: देश के किन राज्यों में होती है LPG की सबसे ज्यादा खपत, जानिए टॉप- 5 राज्य

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और...

2027 चुनाव से पहले पश्चिमी UP पर सपा का फोकस, दादरी से अखिलेश यादव शुरू करेंगे अभियान

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा...

Share Market Today: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, 873 अंक टूटा Sensex, Nifty भी 254 अंक फिसला

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार...