नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । दिल्ली में 10 नवंबर की शाम हुए कार ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर दिया है। जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। खुफिया एजेंसियों को फिदायीन हमले का शक है। लाल किले के पास नेताजी सुभाष मार्ग पर i20 कार में विस्फोट से 8 लोगों की मौत और 20 घायल हुए। जांच एजेंसियां सक्रिय हैं।
दिल्ली पुलिस ने कार ब्लास्ट मामले में आतंकी साजिश की आशंका को देखते हुए यूएपीए की धारा 16 और 18 के तहत केस दर्ज किया है। साथ ही, FIR में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3 और 4 भी जोड़ी गई है। जांच एजेंसियां अब आतंकी नेटवर्क की कड़ी तलाश में जुटी हैं।
दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच में पुलिस की स्पेशल सेल को कई अहम सुराग मिले हैं, जो हमले के फिदायीन आतंकी साजिश होने की ओर इशारा करते हैं। विस्फोट में इस्तेमाल i20 कार हरियाणा के गुरुग्राम नॉर्थ आरटीओ में पंजीकृत थी। नंबर HR 26 7624 मोहम्मद सलमान के नाम पर था, जिसे पुलिस ने हिरासत में लिया है।
कार ब्लास्ट मामले में बड़ा मोड़ आया है। आरोपी सलमान ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने यह कार पुलवामा निवासी तारिक नाम के शख्स को बेची थी। हैरानी की बात यह है कि इसी कार का 15 सितंबर को फरीदाबाद में गलत पार्किंग पर 1723 रुपये का चालान कटा था। अब तारिक को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
i20 कार में आतंकी उमर के सवार होने का शक
स्पेशल सेल के सूत्रों के मुताबिक, इस धमाके के तार फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़े हो सकते हैं, जिसका भंडाफोड़ 9 नवंबर की रात हुआ था। खुफिया एजेंसियों को शक है कि i20 कार में आतंकी डॉक्टर उमर मोहम्मद सवार था जो अब भी फरार है।
दिल्ली पुलिस अब कार में सवार मृत व्यक्ति का डीएनए टेस्ट करवाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वह फरार आतंकी डॉक्टर उमर मोहम्मद था या नहीं। सूत्रों के अनुसार, धमाके के समय कार में तीन संदिग्ध मौजूद थे। जांच एजेंसियां उनकी पहचान और नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।
जांच में सीसीटीवी फुटेज से बड़ा खुलासा
दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच में सीसीटीवी फुटेज ने बड़ा खुलासा किया है। स्पेशल सेल के अनुसार, 10 नवंबर दोपहर 3:19 बजे i20 कार लाल किले के पास सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में दाखिल हुई और करीब तीन घंटे तक वहीं खड़ी रही। शाम 6:48 बजे बाहर निकलने के सिर्फ चार मिनट बाद, 6:52 बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस मार्ग पर विस्फोट हुआ। जांच एजेंसियों को शक है कि मस्जिद की पार्किंग में ही कार में विस्फोटक प्लांट किया गया था। पुलिस ने ब्लास्ट से ठीक पहले की तस्वीर भी जारी की है, जिसमें कार मस्जिद के पास जाती नजर आ रही है।
i20 कार ब्लास्ट की जांच में नया खुलासा
लाल किले के पास नेताजी सुभाष मार्ग पर हुए i20 कार ब्लास्ट की जांच में नया खुलासा हुआ है। विस्फोट में इस्तेमाल कार फरीदाबाद के सेक्टर-37 स्थित ‘रॉयल कार जोन’ नामक यूज्ड कार डीलर से खरीदी गई थी। आजतक ने डीलर से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनके मोबाइल बंद मिले। धमाके की तीव्रता इतनी भयावह थी कि आसपास की छह गाड़ियां और तीन ऑटोरिक्शा जल गए, स्ट्रीट लाइटें टूट गईं और लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास की दुकानों के शीशे चकनाचूर हो गए।
NIA, NSG और फॉरेंसिक टीमें मौके पर पहुंचीं और सैंपल जुटाए। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सभी एंगल से जांच चल रही है और यदि यह आतंकी वारदात साबित होती है, तो पूरी साजिश उजागर की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़
फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। यह मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवात-उल-हिंद (AGuH) जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा था और पाकिस्तान से संचालित हो रहा था। सूत्रों के मुताबिक, इस मॉड्यूल में दो पुरुष और एक महिला डॉक्टर शामिल थे। फरीदाबाद के डॉ. मुजम्मिल अहमद गनाई (अल-फलाह यूनिवर्सिटी), पुलवामा के डॉ. आदिल अहमद राथर और लखनऊ की डॉ. शाहीन शाहिद, जिनकी कार से AK-47 बरामद हुई थी।
फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल के कई और सदस्य पकड़े गए
दिल्ली कार ब्लास्ट मामले में फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल के कई और सदस्य पकड़े गए हैं। इनमें आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ, मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद (सभी श्रीनगर), मौलवी इरफान अहमद (शोपियां) और जमीर अहमद अहांगर (गंदरबल) शामिल हैं। 10 नवंबर को डॉक्टर मुजम्मिल के धौज गांव स्थित किराए के घर से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, IED बनाने की 2900 किलो सामग्री, AK-56, AK Krinkov, बरेटा और चीनी स्टार पिस्टल, सैकड़ों कारतूस, डेटोनेटर, वायर, टाइमर और रिमोट कंट्रोल जब्त किए गए। पुलिस के अनुसार यह मॉड्यूल दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में बड़े हमलों की योजना बना रहा था और ये आरोपी ‘व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क’ का हिस्सा थे पढ़े-लिखे पेशेवर जो आतंकवाद को तकनीकी और आर्थिक मदद दे रहे थे।





