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संत रविदास की आध्यात्मिक ऊंचाई को मैंने अनुभव किया है : पीएम मोदी (लीड 4)

नई दिल्ली, 28 फरवरी (हि.स)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जी की जयंती होती है। आज भी उनके शब्द, उनका ज्ञान हमारा पथ-प्रदर्शन करते हैं। युवाओं को संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा कि संत रविदास जी ‘अपने पैरों पर खड़े होने की बात करते थे। हम अपने सपनों के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहें, यह बिलकुल ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो जैसा है, वह वैसा ही चलता रहे, संत रविदास जी कभी भी इसके पक्ष में नहीं थे। आज हम देखते हैं कि देश का युवा भी इस सोच के पक्ष में बिलकुल नहीं है। संत रविदास की पंक्ति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा- ‘एकै माती के सभ भांडे, सभ का एकौ सिरजनहार। रविदास व्यापै एकै घट भीतर, सभ कौ एकै घड़ै कुम्हार।’ अर्थात हम सभी एक ही मिट्टी के बर्तन हैं। हम सभी को एक ने ही गढ़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त विकृतियों पर हमेशा खुलकर अपनी बात कही। उन्होंने इन विकृतियों को समाज के सामने रखा, उसे सुधारने की राह दिखाई। अपनी बात को पुष्ट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने मीरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तभी तो मीरा ने कहा है- ‘गुरु मिलिया रैदास, दीन्हीं ज्ञान की गुटकी।’ इसी संदर्भ में उन्होंने आगे कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मैं संत रविदास जी की जन्मस्थली वाराणसी से जुड़ा हुआ हूं। संत रविदास जी के जीवन की आध्यात्मिक ऊंचाई को और उनकी ऊर्जा को मैंने उस तीर्थ स्थल में अनुभव किया है। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी कहते थे- ‘करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियो आस। कर्म मानुष का धर्म है, सत् भाखै रविदास।’ अर्थात् हमें निरंतर अपना कर्म करते रहना चाहिए, फिर फल तो मिलेगा ही मिलेगा, यानी, कर्म से सिद्धि तो होती ही होती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे युवाओं को एक बात संत रविदास जी से जरूर सीखनी चाहिए। युवाओं को कोई भी काम करने के लिए खुद को, पुराने तौर तरीकों में बांधना नहीं चाहिए। आप अपने जीवन को खुद ही तय करिए। अपने तौर तरीके भी खुद बनाइए और अपने लक्ष्य भी खुद ही तय करिए। युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर आपका विवेक, आपका आत्मविश्वास मजबूत है तो आपको दुनिया में किसी भी चीज से डरने की जरूरत नहीं है। मैं ऐसा इसलिए कहता हूं, क्योंकि कई बार हमारे युवा एक चली आ रही सोच के दबाव में वह काम नहीं कर पाते, जो करना वाकई उन्हें पसंद होता है। इसलिए आपको कभी भी नया सोचने, नया करने में, संकोच नहीं करना चाहिए। संत रविदास का स्मरण कराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संत रविदास जी ने एक और महत्वपूर्ण सन्देश दिया है। यह सन्देश है ‘अपने पैरों पर खड़ा होना’। हम अपने सपनों के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहें, यह बिलकुल ठीक नहीं है। जो जैसा है, वह वैसा ही चलता रहे, रविदास जी कभी भी इसके पक्ष में नहीं थे। आज हम देखते हैं कि देश का युवा भी इस सोच के पक्ष में बिलकुल नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब मैं देश के युवाओं में इनोवेशन स्पिरिट देखता हूं तो मुझे लगता है कि हमारे युवाओं पर संत रविदास जी को जरूर गर्व होता। हिन्दुस्थान समाचार/ब्रजेश

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