जम्मू, 06 मई (हि.स.)। तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन मोहम्मद अशरफ सहरेई का शव गुरुवार को कश्मीर घाटी के लोलाब में उनके पैतृक गांव में दफन कर दिया गया। प्रशासन ने इस दौरान पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात करके कब्रिस्तान की ओर जाने वाले सभी प्रवेश द्वारों को सील कर दिया था। एक दर्जन से अधिक परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को उनकी अंतिम यात्रा में भाग लेने की अनुमति दी गई। उत्तरी कश्मीर में कुपवाड़ा जिले के लोलाब घाटी निवासी 78 वर्षीय तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन मोहम्मद अशरफ सहरेई इन दिनों पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत ऊधमपुर जेल में बंद थे। मंगलवार को तबीयत खराब होने के बाद उनको जम्मू के राजकीय मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में भर्ती करवाया गया था। यहां स्वास्थ्य की जांच के बाद डॉक्टरों ने सहरेई को जिला अस्पताल ऊधमपुर भेजा। बाद में डाक्टरों ने सहरेई को जम्मू के राजकीय मेडिकल कालेज में शिफ्ट कर दिया। सहरेई का इलाज कर रहे डाक्टरों का कहना था कि सहरेई को कमजोरी थी और उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत आ रही थी। मंगलवार शाम तक उनकी हालत में सुधार हुआ था परंतु बुधवार सुबह एक बार फिर हालत खराब हो गई। जीएमसी प्रशासन ने कहा कि दोपहर बाद उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जिला प्रशासन ने उनके परिवार को भी उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बारे में सूचित किया था। उनका ऑक्सीजन लेवल लगभग 65 से 70 था। हालांकि कोविड-19 के लिए उनका रैपिड और आरटी-पीसीआर परीक्षण नकारात्मक था। सेहराई ने अपने जीवन के कई साल जेल में बिताए हैं और उनको जुलाई 2020 में सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत नज़रबंद किया गया था। अधिकारियों ने परिवार को पैतृक गांव में ही कोविड प्रोटोकॉल के तहत सेहराई का शव दफनाने की अनुमति दी थी। चिकित्सा एवं कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उनके शव को जम्मू से गुरुवार तड़के कुपवाड़ा ले जाया गया। प्रशासन ने सेहराई के पैतृक गांव में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टुकड़ी तैनात की और कब्रिस्तान की ओर जाने वाले सभी प्रवेश द्वारों को सील कर दिया था। परिवार के एक दर्जन से अधिक सदस्यों और रिश्तेदारों को उनकी अंतिम यात्रा में भाग लेने की अनुमति दी गई। हिन्दुस्थान समाचार/बलवान/सुनीत





