नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले के बाद नौकरी गंवाने वाले शिक्षक अब भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। ये प्रदर्शनकारी शिक्षक साल्ट लेक स्थित स्कूल सेवा आयोग (SSC) के मुख्यालय ‘आचार्य सदन’ के बाहर 9 अप्रैल की रात से धरने पर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को बताया “दोषपूर्ण और भ्रष्ट”
पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने 2016 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को गलत करार देते हुए 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ है। यह फैसला कलकत्ता हाई कोर्ट के पहले के निर्णय को बरकरार रखता है।
शिक्षकों ने कहा – दोष आयोग का, सजा हमें क्यों?
धरना दे रहे शिक्षकों का कहना है कि उन्हें बेवजह सजा दी जा रही है, जबकि गलती एसएससी की थी। उनका कहना है कि आयोग ने यह नहीं देखा कि किसने फर्जी दस्तावेज दिए और किसने ईमानदारी से परीक्षा पास की। सभी को एक साथ नौकरी से निकाल देना अन्याय है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने आरोप लगाया कि जब वे 9 अप्रैल को दक्षिण कोलकाता के कस्बा स्थित जिला निरीक्षक (DI) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया, धक्का-मुक्की की और कुछ को लात भी मारी।
भाजपा सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय पहुंचे समर्थन में
भाजपा सांसद और कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय धरना स्थल पर पहुंचे और शिक्षकों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह अन्याय है कि निर्दोष शिक्षकों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किए गए हैं। उन्होंने राज्य प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। गंगोपाध्याय ने कहा कि उन्होंने शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु से मुलाकात नहीं की, क्योंकि वे पुलिस कार्रवाई से नाराज़ हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि भाजपा नेतृत्व उनके साथ खड़ा है।
भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी
इस भर्ती घोटाले में सीबीआई और ईडी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत कई अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि वे भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार में शामिल थे। प्रदर्शनकारी शिक्षक फिलहाल भूख हड़ताल पर हैं और उन्होंने कहा है कि आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे।





