नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । अक्सर खबरों में पढ़ने को मिलता है कि किसी व्यक्ति की मौत तेज आवाज की वजह से हो गई। इंटरनेट पर ऐसी सैकड़ों रिपोर्ट्स मिल जाएंगी, जिनमें तेज शोर के चलते जान जाने की बात कही गई है। ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि क्या शादी-ब्याह या पार्टियों में बजने वाला तेज डीजे भी इतना घातक हो सकता है? इसका उत्तर है हां। डीजे की तेज आवाज इंसान की जान ले सकती है, क्योंकि हमारी सुनने की क्षमता सीमित होती है और जब शोर इस सीमा से आगे बढ़ता है, तो इससे दिल का दौरा और अन्य गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
लाउड म्यूजिक सेहत के लिए कितना खतरा पैदा कर सकता है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 12 से 35 वर्ष की आयु के करीब एक अरब लोग लगातार तेज म्यूजिक और शोरगुल वाले माहौल में रहने के कारण सुनने की क्षमता घटने के जोखिम में हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) का मानना है कि अगर व्यक्ति लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहता है, तो उसकी सुनने की शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। तेज डेसिबल स्तर शरीर को कई गंभीर बीमारियों की ओर ले जाता है।
जब आवाज की तीव्रता एक निर्धारित सीमा से ज्यादा हो जाती है, तो व्यक्ति को चिड़चिड़ापन और बेचैनी महसूस होने लगती है। इसका सीधा असर दिल पर पड़ता है, जिससे हृदय संबंधी रोग जन्म ले सकते हैं। कुछ अध्ययनों में यह सामने आया है कि लगातार तेज़ शोर न केवल बहरेपन का कारण बन सकता है, बल्कि यह मानसिक तनाव, सिरदर्द, उच्च रक्तचाप, नींद की कमी, याददाश्त में गिरावट, एकाग्रता की कमी और यहां तक कि ब्रेन हैमरेज और हार्ट अटैक की वजह भी बन सकता है।
इंसान कितनी तेज आवाज सहन कर सकता है?
हर व्यक्ति की सुनने की क्षमता अलग होती है। कुछ लोग ज्यादा तेज आवाज सह सकते हैं, जबकि कुछ कम। हियरिंग हेल्थ फाउंडेशन का कहना है कि 70 डेसिबल या उससे कम ध्वनि सुरक्षित मानी जाती है। इससे ऊपर की आवाज शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
इयरफोन या ईयरबड्स पर यदि वॉल्यूम 60% रखा जाए तो भी यह 75–80 डेसिबल तक पहुंच जाता है, जबकि फुल वॉल्यूम 100–110 डेसिबल के बीच हो सकती है। इस स्तर की आवाज लगातार सुनना आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। कभी-कभी 185 से 200 डेसिबल तक की तीव्र ध्वनि किसी व्यक्ति के लिए जानलेवा भी हो सकती है। यह हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।





