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Monday, March 16, 2026
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कैसे तय होती है एलिमनी की रकम, क्या है नियम? अतुल सुभाष की खुदकुशी के बाद चर्चा में है एलिमनी

अतुल सुभाष की खुदकुशी के बाद चर्चा में है एलिमनी। आज हम इस खबर के माध्यम से जानेंगे कि तलाक के बाद पत्नी के लिए एलिमनी की रकम तय करने के लिए क्या नियम हैं।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आए दिन सोशल मीडिया में तलाक की खबरें आती रहती हैं। जिसके बाद पत्नी अपने भरण-पोषण के लिए पति से एलिमनी की रकम की मांग भी करती है। अतुल सुभाष की खुदकुशी के बाद इस बात की चर्चा और तेज हो चली है जो अपनी ही पत्नी निकिता सिंघानिया से इस विवाद को लेकर जूझ रहे थे। तो आज हम इस खबर के माध्यम से बताएंगे कि एलिमनी की रकम को कैसे तय किया जाता है? इसके अलावा हम ये भी जानेंगे कि क्या पति भी अपनी पत्नी से एलिमनी की रकम की मांग कर सकता है? 

पति की नेट सैलरी का 25% गुजारा भत्ता पत्नी को दिया जा सकता है

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पति या पत्नी तलाक के बाद अपने पार्टनर को एलिमनी (Alimony) की रकम देते हैं, जिससे वह अपना भरण-पोषण कर सके। सरल भाषा में बताएं तो, जो पार्टनर अपना गुजर-बसर करने में असमर्थ है तो उसको दूसरा पार्टनर एलिमनी की रकम देता है। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, एलिमनी प्राप्त करने का अधिकार उस व्यक्ति की आय अर्जित करने की क्षमता पर निर्भर करता है, जो आर्थिक रूप से विवाह पर निर्भर करता है। एलिमनी की रकम प्राप्त करने वाला पति, पत्नी, गरीब माता-पिता और आश्रित बच्चे भी हो सकते हैं। 

आमतौर पर एलिमनी की रकम पति द्वारा पत्नी को दी जाती है, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि पति अपनी पत्नी से अलिमोनी की मांग नहीं कर सकता। अगर पति की आय पत्नी की आय से कम है या वह बेरोजगार है, तो ऐसी अवस्था में पति अपनी पत्नी से एलिमनी की रकम की मांग कर सकता है। 

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक बड़े फैसले में पति द्वारा अपनी अलग हुई पत्नी को दिए जाने वाले भरण-पोषण के लिए एक बेंचमार्क सेट किया है। सुप्रीम के इस बड़े फैसले में कहा गया है कि पति की नेट सैलरी का 25% गुजारा भत्ता पत्नी को दिया जाना उचित राशि हो सकती है। जो कि पति द्वारा अपनी पत्नी को हर महीने गुजारा भत्ता के रूप में देने के लिए उपयुक्त है। 

एकमुश्त राशि के लिए एलिमनी का नियम

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, एकमुश्त राशि के लिए इस तरह का कोई बेंचमार्क नहीं दिया गया है, लेकिन अधिकतर मामलों में यह पति या पत्नी की कुल संपति का 1/5वां से 1/3वां हिस्सा ही होता देखा गया है। बता दें कि भारतीय कानून के तहत एलिमनी की कैल्कुलेशन करने का कोई कठोर नियम परिभाषित नहीं किया गया है, न ही यह संभव हो सकता है। क्योंकि हर एक मामला परिस्थितियों और तथ्यों पर निर्भर करता है।

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