नई दिल्ली, 22 जून (हि.स.)। दिल्ली की पटियाला हाउस ने टेरर फंडिंग के मामले में जेल में बंद शब्बीर शाह की जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दिया है। एडिशनल सेशंस जज धर्मेंद्र राणा ने जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 29 जून को करने का आदेश दिया। आज सुनवाई के दौरान ईडी ने शब्बीर शाह की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ये एक गंभीर अपराध है जिसमें पाकिस्तान समेत दूसरे देशों से कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए टेरर फंडिंग को अंजाम दिया गया। इस अपराध में शब्बीर शाह ने खासी भूमिका निभाई। मनी लाउंड्रिंग के जरिये अपराधी धन के असली स्रोत को छिपाते हैं ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संदेह नहीं हो। ईडी के मुताबिक शब्बीर शाह जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद के भी संपर्क में था। जमात-उद-दावा पर संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध लगा चुका है। ईडी ने कहा कि शब्बीर शाह मोहम्मद शफी शायर के संपर्क में भी था जो जम्मू की जेल से निकलने के बाद अपने परिवार समेत पाकिस्तान भाग गया था। ईडी ने कहा कि इन गंभीर अपराधों की अभी आगे जांच करनी है। ऐसे में अगर शब्बीर शाह को रिहा किया गया तो पूरी साजिश का पता लगाने की प्रक्रिया को झटका लगेगा। पिछले 20 मार्च को कोर्ट ने शब्बीर शाह की पत्नी डॉक्टर बिल्किस शाह के खिलाफ मनी लाउंड्रिंग के मामले में ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। सितंबर 2020 में ईडी ने इस मामले में पूरक चार्जशीट दाखिल किया था। ईडी ने पूरक चार्जशीट में शब्बीर शाह की पत्नी डॉक्टर बिल्किस शाह को आरोपी बनाया था।मनी लाउंड्रिंग के मामले में ईडी ने अपने पहले के चार्जशीट में शब्बीर शाह के अलावा हवाला डीलर मोहम्मद असलम वानी को आरोपी बनाया था। चार्जशीट के मुताबिक डॉक्टर बिल्किस शाह ने असलम वानी से तीन बार में दो करोड़ आठ लाख रुपये लेने की बात कबूल की है। चार्जशीट में डॉक्टर बिल्किस पर शब्बीर शाह की मदद करने का आरोप लगाया गया है। डॉक्टर बिल्किस ने 2013 के बाद कोई इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया क्योंकि उसके पास अपनी निजी प्रैक्टिस और सैलरी के अलावा कोई दूसरी आमदनी नहीं थी। शब्बीर शाह फिलहाल तिहाड़ जेल में दो मामलों में जेल में बंद है। एक मामला टेरर फंडिंग का है और दूसरा मनी लाउंड्रिंग का है। शब्बीर शाह के खिलाफ 2005 के मनी लाउंड्रिंग के केस में 2007 में केस दर्ज किया गया था।शब्बीर शाह को 25 जुलाई 2017 को ईडी ने गिरफ्तार किया था। हिन्दुस्थान समाचार/संजय




