नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में हरियाणा को पानी देने से इनकार किया था, जिस पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भगवंत मान के बयान को “तथ्यों से परे” बताया और कहा कि यह दलगत राजनीति से प्रेरित है।
“यह SYL नहीं, पीने के पानी का मामला है”
CM नायब सिंह सैनी ने कहा कि भगवंत मान इस विषय को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह मुद्दा सतलुज-यमुना लिंक (SYL) का नहीं बल्कि आम जनता के पीने के पानी का है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की निगरानी कर रहा है और इसे लेकर भ्रामक बातें नहीं फैलानी चाहिए।
“हरियाणा को नहीं मिला उसका हिस्सा”
सीएम सैनी ने बीबीएमबी (Bhakra Beas Management Board) के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि अप्रैल से जून तक हर साल हरियाणा को 9,000 क्यूसेक पानी मिलना तय है। इसमें दिल्ली को 500, राजस्थान को 800 और पंजाब को 400 क्यूसेक पानी मिलता है। इसके बाद हरियाणा को 6,800 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, लेकिन उसे अब तक यह मिला ही नहीं। उन्होंने भगवंत मान के इस दावे को खारिज किया कि हरियाणा मार्च में ही 103% पानी का उपयोग कर चुका है।
“मेहमान को भी पानी देते हैं, हरियाणा तो पड़ोसी है”
सीएम सैनी ने कहा: “हमारी संस्कृति है कि घर आए मेहमान को पानी पिला कर स्वागत करते हैं, तो क्या हरियाणा को पीने का पानी देना मुश्किल है? आपसे अनुरोध है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठें। अगर पानी नहीं छोड़ा तो वह पाकिस्तान चला जाएगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अगर जून से पहले जलाशयों को खाली नहीं किया गया तो मानसून के समय पानी ओवरफ्लो होकर पाकिस्तान की तरफ चला जाएगा। यह न तो पंजाब के हित में है और न ही देश के। इसलिए आपसे अपील करता हूं कि हरियाणा को उसका जायज़ पानी दें और राष्ट्रहित में सहयोग करें।
“CM मान ने वादा किया था, लेकिन निभाया नहीं”
सीएम सैनी ने बताया कि उन्होंने 26 अप्रैल को भगवंत मान से फोन पर बात की थी, तब उन्होंने शाम तक पानी छोड़ने का आश्वासन दिया था। “मान साहब ने कहा था कि शाम तक पानी छोड़ा जाएगा और बधाई भी दूंगा, लेकिन अगले दिन पंजाब के अधिकारियों ने कुछ नहीं किया और फोन तक नहीं उठाया। हरियाणा और पंजाब के बीच पानी को लेकर विवाद नया नहीं है, लेकिन अब यह सामान्य जनता के जीवन से जुड़ा गंभीर मामला बन चुका है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री आमने-सामने हैं और अब यह मामला फिर चर्चा में है। देखने वाली बात होगी कि केंद्र सरकार या सुप्रीम कोर्ट इसमें क्या हस्तक्षेप करती है।




