नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर कहा है कि ज्ञानवापी साक्षात विश्वनाथ हैं। उन्होंने कहा कि इसे मस्जिद कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। भौतिकता ही अखंडता की बाधा है। इसे आज दूसरे शब्दों में लोग मस्जिद कहते हैं।
योगी ने सुनाई शिव जी की कहानी
उन्होंने कहा,’आदि शंकर जब काशी में अपने अद्वैत ज्ञान से आगे की साधना करने पहुंचे, तो साक्षात भगवान विश्वनाथ ने उनकी परीक्षा ली। एक दिन ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान के लिए जा रहे आदि शंकराचार्य के रास्ते में बाबा विश्वनाथ सबसे अधूत कहे जाने वाले एक सामान्य व्यक्ति यानी चांडाल का रूप धरकर खड़े हो गए।
क्या कहा था चांडाल ने
मुख्यमंत्री ने आगे कहा,’चांडाल के मुंह से ज्ञान की बात सुनकर शंकराचार्य हैरान हुए और उनका परिचय पूछा। उन्होंने कहा कि आप कौन हैं, मैं यह जानना चाहता हूं। इस पर चांडाल ने कहा कि आप जिस ज्ञानवापी की साधना के लिए, (फिर बीच में बातचीत को चांडाल की कथा से हटकर ज्ञानवापी विवाद का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ बोले) दुर्भाग्य से वो (मुस्लिम) ज्ञानवापी को आज दूसरे शब्दों में मस्जिद कहते हैं, लेकिन वो ज्ञानवापी खुद साक्षात विश्वनाथ ही हैं, जिस ज्ञानवापी की उपासना के लिए आप केरल से चलकर यहां आए हैं, मैं उसका साक्षात स्वरूप विश्वनाथ हूं।’
ज्ञानवापी मस्जिद को हिंदू पक्ष असली काशी विश्वनाथ मंदिर मानता है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मंदिर को मुगल बादशाह के इशारे पर ध्वस्त करने के बाद मस्जिद का निर्माण किया गया है।
मंदिर में पूजा के अधिकार का मुकदमा किया गया
इसके मद्देनजर मस्जिद परिसर में पूजा के अधिकार का मुकदमा हिंदू पक्ष ने अदालत में दाखिल कर रखा है, जिस पर सुनवाई चल रही है। इसके उलट मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद से पहले वहां कोई मंदिर नहीं था। हालांकि अदालत के आदेश पर की गई जांच में भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) ने भी मस्जिद के अंदर मंदिर से जुड़े तमाम चिह्न होने की पुष्टि की है।





