नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। देश में बाल विवाह को रोकने के लिए सरकार लगातार जागरूकता अभियान चला रही है और सख्त कानून भी लागू हैं। इसके बावजूद आज भी कई राज्यों में लड़कियों की शादी 18 साल से पहले कर दी जा रही है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट 2024 में इसको लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अब भी हजारों लड़कियां ऐसी हैं जिनकी शादी पढ़ाई की उम्र में ही कर दी जाती है। इससे उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर सीधा असर पड़ता है।
देश में कितनी लड़कियों की हो रही कम उम्र में शादी?
SRS रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत में साल 2024 में हुई कुल शादियों में 2.1 प्रतिशत लड़कियां ऐसी थीं जिनकी उम्र 18 साल से कम थी। वहीं 24.5 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 से 20 साल की उम्र के बीच हुई। हालांकि राहत की बात यह है कि करीब 73.5 प्रतिशत महिलाओं की शादी 21 साल या उससे अधिक उम्र में हुई। इसके बावजूद आंकड़े बताते हैं कि देश में हर चार में से एक लड़की की शादी 21 साल से पहले हो रही है।
बाल विवाह में कौन-सा राज्य सबसे आगे?
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल बाल विवाह के मामलों में देश में सबसे ऊपर है। यहां 6.3 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से पहले कर दी जाती है। इसके बाद झारखंड दूसरे नंबर पर है, जहां यह आंकड़ा 4.9 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं छत्तीसगढ़ में 2.9 प्रतिशत लड़कियों की शादी नाबालिग उम्र में हो रही है।
बिहार, असम और ओडिशा की स्थिति भी चिंताजनक
रिपोर्ट में बताया गया है कि असम में 2.8 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो रही है। बिहार और ओडिशा दोनों राज्यों में यह आंकड़ा 2.6 प्रतिशत दर्ज किया गया है राजस्थान, जो लंबे समय से बाल विवाह के लिए चर्चा में रहा है, वहां भी 2.4 प्रतिशत लड़कियों की शादी कम उम्र में हो रही है।
राष्ट्रीय औसत के आसपास हैं कई बड़े राज्य
देश में बाल विवाह का औसत 2.1 प्रतिशत है। गुजरात और मध्य प्रदेश में भी यही आंकड़ा दर्ज किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में यह प्रतिशत 1.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है। दक्षिण भारत के तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई दी।
दिल्ली और केरल ने पेश की मिसाल
इस रिपोर्ट में सबसे अच्छी स्थिति दिल्ली और केरल की सामने आई है।
दिल्ली में नहीं मिला एक भी मामला
दिल्ली में सर्वे के दौरान बाल विवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया। यानी यहां यह आंकड़ा शून्य रहा।
केरल में बेहद कम मामले
केरल में बाल विवाह का प्रतिशत सिर्फ 0.04 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो देश में सबसे कम आंकड़ों में शामिल है।
ग्रामीण इलाकों में ज्यादा हो रहे बाल विवाह
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह की समस्या ज्यादा गंभीर है। ग्रामीण भारत में बाल विवाह दर: 2.4% शहरी भारत में बाल विवाह दर: 1.1% हालांकि पश्चिम बंगाल के शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 7.6 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो काफी चिंताजनक माना जा रहा है।
कम उम्र में शादी का लड़कियों पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में शादी होने से लड़कियों की पढ़ाई छूट जाती है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन पातीं। इसके अलावा कम उम्र में गर्भधारण से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे भी बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि सरकार और सामाजिक संगठन लगातार बाल विवाह रोकने के लिए अभियान चला रहे हैं।
महिलाओं की शादी की औसत उम्र बढ़ी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत में महिलाओं की औसत शादी की उम्र अब बढ़कर 23.1 वर्ष हो गई है। इसे सामाजिक बदलाव और जागरूकता का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को पूरी तरह खत्म करने के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है।





