नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड 98 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ चुका है, लेकिन इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में आम लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर जब दुनिया में तेल सस्ता हो रहा है तो भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों हो रहा है।
फिर बढ़ गए पेट्रोल-डीजल के दाम
25 मई को पेट्रोल की कीमत में 2 रुपये 61 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 2 रुपये 71 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। पिछले दो हफ्तों में चार बार कीमतें बढ़ चुकी हैं। इस दौरान पेट्रोल करीब 8 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्यों घटे तेल के दाम?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद के चलते वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट आई है। WTI और Brent Crude में गिरावट WTI Crude करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया Brent Crude 98 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया, इसके बावजूद भारतीय बाजार में उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल रही है।
तेल कंपनियां क्यों बढ़ा रही हैं कीमतें?
भारत की सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पहले भारी नुकसान झेल चुकी हैं।
पहले घाटा सहकर नहीं बढ़ाए थे दाम
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, तब इन कंपनियों ने तुरंत कीमतें नहीं बढ़ाईं। कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत खुद उठाई ताकि आम लोगों पर ज्यादा बोझ न पड़े।
अब पुराने घाटे की भरपाई
अब जब वैश्विक बाजार में तेल थोड़ा सस्ता हुआ है, तो कंपनियां अपने पुराने नुकसान की भरपाई कर रही हैं। यही वजह है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम अभी भी बढ़ रहे हैं।
भारत की तेल आयात पर भारी निर्भरता
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ा सा बदलाव भी सीधे भारत के खर्च और बजट पर असर डालता है।
डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया भी बड़ी वजह
भारत कच्चे तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर में करता है। अगर डॉलर मजबूत होता है और रुपया कमजोर पड़ता है, तो तेल आयात महंगा हो जाता है। यानी अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता भी हो जाए, लेकिन रुपया कमजोर रहे तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम नहीं हो पातीं।
पेट्रोल-डीजल पर टैक्स भी बढ़ाता है बोझ
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करती। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स का भी बड़ा हिस्सा शामिल होता है।
किन चीजों से तय होती है कीमत?
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत डॉलर-रुपया विनिमय दर एक्साइज ड्यूटी, वैट (VAT), ट्रांसपोर्ट और डीलर कमीशन इन सभी को जोड़ने के बाद उपभोक्ताओं तक अंतिम कीमत पहुंचती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और नीचे नहीं आतीं, रुपया मजबूत नहीं होता और टैक्स में राहत नहीं मिलती, तब तक भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होना मुश्किल है।





